baccho-ko-dakaar-kaise

पहली बार एक बच्चे को दूध पिलाना किसी भी नए माता-पिता के लिए एक रोमांचक अनुभव होता है, लेकिन यह अनुभव भयभीत करने वाला भी हो सकता है | डकार का अनुभव एक मस्तीभरा अनुभव होता है | जब बच्चे डकारते है तब वे हवा को अपने पेट में छोड़ते है | यह उन्हें आरामदायक, कम उधम मचाने एवं ज्यादा समय तक भोजन करने के सक्षम बनाता है |

अपने शिशु को अपनी छाती के विपरीत पकड़े

अपने शिशु को ऐसे पकड़े की उसकी ठुड्डी आपके कंधे पर आए | अपना स्थान और शिशु का सिर सही स्थान पर है यह जानने के लिए आप आइने का इस्तेमाल कर सकते हैँ | एक हाथ से अपने शिशु को सहारा दें और दूसरे हाथ से उसके हाथ को रगड़े या थपथपाएँ | दोलन कुर्सी पर बैठ कर अपने शिशु की पीठ को धीरे धीरे रगड़े|

अपने शिशु का मुह दूसरी दिशा में करके उसे अपनी गोद में बिठाएँ

एक हाथ का उपयोग उसे सहारा दाना में लें और हथेली से छाती को सहारा दें और अपनी उँगलियों से शिशु की ठुड्डी एवं जबड़े को धीरे से सहारा दें (शिशु की ठुड्डी ही पकड़ें गला नहीं) दूसरे हाथ का प्रयोग शिशु को धीरे से थपकी देने में करें |

अपने शिशु का मुह नीचे की ओर करके अपने पाँव पर

अपने शिशु को अपने शरीर से सीधा रख कर अपने घुटनों पर लेटाएं | एक हाथ से उसकी ठुड्डी और जबड़े को सहारा दें| अपने शिशु को धीरे से पीछे से थप्पी दें | इस चीज का ध्यान रहे की शिशु का सिर उसके शरीर से उपर है तो खून सिर की और ना बहे |दूसरे हाथ से शिशु के पीछे के हिस्से पर थपकी दें या उसे रगड़े |

अगर आपका शिशु खिलाते समय बेचैन हो जाता है तो खिलाना बंद करें ,उसे डकार दिलाएँ   और खिलाना पुनः शुरु करें | हर 5 मिनट के काल में अपने शिशु को डकार दिलाने की कोशिश करें| अगर शिशु डकार नहीं लेता है तो अपनी स्थिति को परिवर्तन करे एवं खिलाने से पहले वापिस डकार दिलाने की कोशिश करें| खिलाने के बाद अपने शिशु को डकार दिलाना ना भूले |

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