sishu-me-kolilkh-ke-11-gharelu-nuskhe

1. एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ के बीज 2 से 3 मिनट तक उबालें और फिर उसे 15-20 मिनट तक ठंडा होने दें| इसको हर बार दूध पिलाते समय 1-2 चम्मच दूध में दाल दें| यह पेट दर्द के इलाज में सहायक है|
2. जायफल को और दूध या गरम पानी मिला कर पीस लें और अगर शिशु रात को बिना किसी वजह रोता है तो उसे पिलाएं|
3. घरेलु उपचार के तौर पर हिंग को पानी में घोल कर, शिशु की नाभि की चारों ओर लगाएं| नाभि के अन्दर नहीं लगाया है, यह सुनिश्चित करें| यह गैस के दर्द से तत्काल राहत प्रदान करता है|
4. गाढे पानी की नियमित खुराक भी सहायक है|
5.आप कब्ज से राहत दिलाने के लिए गरम पान के पत्ते को शिशु के पेट पर भी रख सकते हैं|
6.एक जानामाना नुश्खा यह भी है की आप 10 से 15 अनाज के बीजों(जो की भारत में “सुवा” के रूप में जाना जाता है) को मसलकर कर एक चम्मच पानी में मिलाएं| यह मिश्रण माँ के दूध की कुछ बूंदों के साथ मिला कर बच्चे को दिया जाना चाहिए|
7.एक कप पानी और एक चुटकी अजवायन को उबाल लें| उसे 2-3 मिनट तक उबलने दें| जब पानी का रंग बदलने लगे तब उसे ठंडा करने के लिए छोड़ दें, पानी को हटा कर बिज को निकाल लें और उसे अधिक उपयोग के लिए आरक्षित करें| 3 से 5 माह तक के शिशु को दिन में 2-3 बार एक चम्मच पिलाएं| 6 माह और इससे अधिक आयु के बच्चों को 2-3 चम्मच दिन में 2 से 3 बार पिला सकते हैं|
8.जो बच्चे चबाना नहीं जानते उन्हें परिपक्व और नरम खुराक दें|
अपने शिशु को गरम पानी से नहलाएं| यह आपके शिशु के लिए सुखदायक साबित होगा एवं आपके बच्चे को विचलित कर नींद दिलाने में सहायता करेगा| अपने शिशु के बाथटब को गरम पानी से भरें| लैवेंडर तेल की कुछ बूंद उस पानी में दाल दें| अब अपने शिशु को इस पानी में नहलाएं| नहलाते समय दर्दनाक गैस को निकालने के लिए शिशु के पेट को मसाज दें|
9.गरम पानी में एक बहुत ही नर्म तौलिया डुबाकर अतिरिक्त पानी को बहार निकाल दें| गरम तौलिये को शिशु के पेट पर रखें| आप कुछ मिनट के लिए तौलिये को चक्र गति में धीरे-धीरे रगड़ भी सकते हैं|
10.शिशु को पेट दर्द ना हो इसलिए शिशु को भोजन के पश्चात डकार दिलाना ना भूलें| डकार दिलाना पेट में बनी गैस को छोड़ने में मदद करेगा एवं पेट में हवा रोकने की जेब जो काफी परेशानी पैदा करती है उसे बनने से बचाएगा| भोजन के पश्चात अपने शिशु को सीधा रख कर अपने कंधे के सामने पकडें| अपने शिशु की गर्दन एवं सिर को अच्छे से सहारा दें| जब तक डकार की आवाज सुनाई ना पड़े तब तक शिशु के पीछे के हिस्से और पेट को रगडें|
11.ताज़ा हवा में जादू होता है| सूरज, हवा, पक्षियों की स्वरमय ध्वनि, यह सब चीज़ें बच्चों का मन बेहलाकर उन्हें आराम देने में सहायता करती हैं|

 

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