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जब भी मैंने किसी बच्चे को नख़रे करते देखा है तो मैंने तुरंत ही इसका दोषी उसके माता पिता माना है। कैसे वे इतना बुरा व्यवहार सहन कर सकते है? जब भी मैंने किसी बच्चे को टीवी देखते हुए पाया, तब भी मैं माता पिता को, बच्चे को कोई अच्छे कार्य में ना लगाने के लिए कसूरवार माना है।मैंने ख़ुद से कहा कि जब मेरे बच्चे होंगे तो मैं ऐसा कुछ नहीं होने दूँगी । अपने पहले बच्चे के लिए तैयारी में मैंने कई लालन पालन की किताबें पढ़ी| मुझे शायद ही अहसास हुआ कि जितना मैं किताब के नियमों की कठिनता से पालन करूँगी उतनी ही बुरी तरह मैं हार जाऊँगी।

उन माता पिताओं को गलत साबित करने की मेरी कोशिशें बार बार मुझ पर ही भारी पड़ी। वे नियम, जो एक जनक होने के नाते, ग्रहण करके मैंने साथ जीने का सोचा, वे दिन चढ़ते ढलते टूट ज़ाते थे। और सच में, क्या सुकून मिला था!

तो अपने आप को परेशानी और तनाव से बचाए और लालन पालन के आनंद को वापस लाएँ। यह नियमों को तोड़ कर भी एक अद्भुत तरीक़े से बच्चे का पालन करें । क्या आप तैयार हैं?

1. मैं अपने बच्चे को कभी जंक भोजन नहीं खिलाऊँगी।

सच में मैंने रहस्य के स्वर में मैगी न्यूडलस वालों का शुक्रिया अदा किया है। चाहे इसे बनाने में 2 मिनट से अधिक समय लगता है, मगर यह प्राण रक्षक हैं। तो इसको अपनाएँ। थके होने और फिर भी रसोई में काम करना सही, का कोई तालमेल नहीं है। कभी कभार उन्हें जंक खाने दें। यह ठीक है।

2. मैं अपने बच्चे को कभी रिश्वत नहीं दूँगी।

अगर आप अपनी स्वच्छता को बचाना चाहती हैं तो यह करें। इन्हें रिश्वत दें।  इन पलों के लिए कुछ ऐसी चीजें (चाॅकलेट, पोकीमौन कार्ड, चिप्स, खिलौने, स्टीकर) रखें ज़िससे आपका बच्चा कहें कि “मम्मी मैं वो सब करूँगा जो आप चाहती हैं”। यह तरीक़ा फायदेमंद है ! समझें क्या?

3. दिन में 30 मिनट से अधिक टी•वी नहीं ।

आप किस से मज़ाक कर रहीं हैं? तब क्या होता है जब आप अपनी परम सहेली से फोन पर बहुत देर तक बात करती हैं? और सच में हम सब यह करते हैं और कभी कभी थोड़ा अधिक अति बचपन को अति मनोरंजक बनाता है। तो अगर कभी कभार टी•वी देखने का समय एक घंटे तक खिंच जाए, तो कोई बात नहीं। यह हमारे बच्चे के दिमाग को ताज़ा कर देगा।कभी कभी आसामान्य परिस्थिती में ऐसा करना अनुचित नहीं माना ज़ाना चाहिये।

4. मारना नहीं।

शी… अभी पुलिस को मत बुलाएँ! हम सब कभी कभार उन्हें एक दो बार पीट देते हैं, क्योंकि हमारी आवाज़ सबसे ऊँचे स्तर से ऊपर भी हो तो भी बच्चे नहीं सुनते या फिर सुनते हैं।

5. साथ में नहीं सोना।

क्या आप भी, लालन पालन का क्या मज़ा अगर आपने बिस्तर पर आपके बच्चे ने  आपको लात नहीं मारी? आगे बढ़िये, उसके साथ सोए, सोने से पहले हँसी के पल सांझा करें, सटकर सोए और आलिंगन करें। यह समय हवा की तरह गुज़र ज़ाता हैं।

6. खेलने से पहले होमवर्क।

कभी सुना है “मेरी मूड अभी ठीक नहीं है?” तो बच्चे भी ऐसा महसूस करते हैं। उन्हें इस प्रतिबंधित कार्य की अनुमति दें दें अगर स्कूल से आते ही उनका होमवर्क करने का मन नहीं तो उन्हें खेलने दें। । स्कूल वैसे ही उन्हें थका देता है। तो क्यूँ ना हम उन्हेंथोड़ी देर का विराम दे?

7. खाली दिमाग शैतान की कार्यशाला है।

क्या सत्य में? अनुसंधान ने यह साबित किया है। स्कूल के बाद होने वाली क्रियाओं से बच्चे की सारणी का अधिभार ना बढ़ाएँ। उनके पास खाली समय रहने दे। उनके दिमाग को खाली रहने दें और नीरस होने दें। नीरसता में भी एक आकर्षण है। यह उन्हें धैर्य और दृढ़ता के बारे में सिखाऐगा। मैंने यह मुश्किल से सीखा जब मेरी बच्चीं के दोस्त ने कहा कि “आंटी, हरि रोज किसी न किसी क्लास के लिए जाती है इसलिए हमें उसके साथ खेलने का मौका नहीं मिलता। ओह! यह पीड़ा पहुँचाता है।

8. मैं नखरों को कभी नहीं सहन करूँगी।

बस चुप रहिए। 2 से 4 का प्रयास करने के बाद हम सब हार मान लेते हैं । “माई वे या हाईवे” वाला रवैया अपने पति के लिए छोड़ दें। बच्चे के लिए, कभी कभी उसे जो चाहिए वह दें, और शांति बरकरार रखें।

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