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बच्चे लगातार कुछ न कुछ सीखते रहते हैं और अपने आप को चोट पहुँचाने के भय के कारण, वे चारों ओर घूमने और अलग-अलग चीज़ें करने की कोशश करना रोक नहीं कर सकते क्योंकि चोट लगना उनके बढ़ने का हिस्सा है |

 वे बिस्तर, पालना, या कुर्सी से गिर सकते हैं और खुद को चोट पहुंचा सकते हैं। अधिकतर चोट उनके सर के पीछे ही लगती है । यदि आपके बच्चे का सर सूज जाए, तो आपको तुरंत क्या करना चाहिए?

परेशान ना हों और तुरंत इन 3 महत्वपूर्ण चरणों का पालन करें:

1. सूजन कम करने में मदद करने के लिए, एक पतली तौलिया में जमे हुए बर्फीले मटर का एक पैकेट रखें या यहाँ तक कि आप पतले तौलिया के उपलब्ध ना होने पर डायपर का भी इस्तेमाल कर सकती हैं | इसे लगभग 2-5 मिनट के लिए बच्चे की सूजन पर रखें। बच्चे को आराम मिलेगा।

2. यदि  सूजन बहुत ज़्यादा है और आपके बच्चे को तकलीफ दे रही है तो उसे डॉक्टर को दिखाएं |

3. तीसरी ज़रूरी चीज है कि अपने बच्चे के सिर को दिल के लेवल से ऊपर उठाये ताकि सूजन में खून ना जमने पाए |

एक बार जब आपने उपर बताये काम कर लिया तो ये अगली कुछ चीजें हैं जो आपको करना चाहिए:

1. व्यवहार में बदलाव के लिए देखें। यदि आपका बच्चा सामान्य रूप से रोता है तो यह ठीक है, लेकिन कुछ हफ्तों तक अपने बच्चे पर ध्यान दें। आवाज़ में परिवर्तन, सजगता, चलते समय संतुलन, सिरदर्द, उल्टी, और पसंद पर कड़ी नजर रखें।

2. सिर की चोटें निशान छोड़ सकती हैं, इस तरह का कोई भी दाग दिखे तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। उन बच्चों के लिए जो बात नहीं कर सकते या चल नहीं सकते, उनके चिल्लाकर रोने की आदत को देखें  ख़ाने में कठिनाई, और उल्टी पर ध्यान दें।

3. अगर घटना के बाद बच्चा सो जाता है तो चिंता न करें, शायद वह कुछ आराम लेना चाहता है। लेकिन यह बेहोश होने से बिलकुल अलग है इसलिए आपको नज़र रखनी चाहिए। डॉक्टर के पास जाने से संकोच ना करें।

आपको गंभीर सहायता के लिए कब कॉल करना चाहिए?

यदि आपके बच्चे को इन सभी लक्षणों में से कुछ भी हो तो तुरंत उसे डॉक्टर के पास ले जाएँ या मदद के लिए जल्द किसी को बुलाएं:

1. बेहोशी

2. खून बहना

3. जब्ती

4. कुछ जवाब ना देना

5. झटका

6. लंबे समय तक रोना या चिल्लाना

ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आप क्या कर सकते हैं?

शिशु हमेशा भटकते रहते हैं या कुछ हरकत करते हैं आखिर वो बढ़ने की उम्र से गुज़र रहे होते हैं, और और वे शरारतें नहीं करेंगे तो सीखेंगे कैसे?

आप हमेशा बच्चे के पीछे नहीं जा सकते हैं और ना हीं उनपर हर वक़्त नज़र रख़ा ज़ा सकता है, लेकिन आप बच्चे के सुरक्षा के लिये घर में बदलाव कर सकते हैं। यहां वहां टक्कर होना चलता रहता है लेकिन बड़े टक्कर से बचने के लिए इन तरीक़ो को आज़मा सकतीं हैं:

1. हर कोने में पैडिंग लगाएं ज़हां आपका बच्चा जा सकता है। जैसे कॉफी टेबल, फर्नीचर, आदि।

2. ना फिसलनें वाली चटाई का उपयोग करें या सभी कालीनों के नीचे स्किड प्रूफ पैड डालें ताकि आपके बच्चे को गिरने से बचा जा सकें।

3.  फर्नीचर को खिड़कियों से दूर रखने की कोशिश करें क्योंकि बच्चे को खिड़कियों पर चढ़ने के लिए ऐसे हीं प्लेटफार्मों का सहारा लेतें हैं। बच्चे को पता नहीं चलता हैं कि सावधानी से कैसे चढ़ना है, इसका परिणाम उनका बुरी तरह गिरना भी हो सकता हैं।

4.  एक बार जब आपका बच्चा पालना में खड़ा हो होने लगता है, तो मोटे गद्दे को पालना के  नीचे कर दें ताकि बच्चे गिरकर खुद को चोट ना पहुंचा सकें।

5.  खिड़कियों के लिए आपको गार्ड का इस्तेमाल करना चाहिए, पर्दे पर भरोसा न करें क्योंकि वो आपके बच्चे को सुरक्षित नहीं रख सकते जब बच्चा पर्दे की छड़ी को पकड़ कर खड़ा होता है तो वह आपके बच्चे पर गिर सकता है।

गिरना, फिर खुद खड़ा होना और आगे बढ़ना जिंदगी ज़ीने के लिये एक महत्वपूर्ण सबक है जो शिशुओं को कम उम्र में सिखाना ज़रूरी है। हर छोटी चोट पर बच्चे को लाड़ प्यार ना दें बल्कि उन्हें मज़बूत होना सिखाएं |

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