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हम दो साल से शादी-शुदा हैं और शादी के पहले छह महीने के बाद से  हमसें  बस यही एक सवाल पुछा जा रहा  है,कि  “खुश खबरी कब दे रहे हो?”| अब भारतीय  और नए विवाहित जोड़े के नाते, हम सब जानते हैं कि इसका मतलब क्या है? यही की परिवार में नया सदस्य यानि बच्चा कब आ रहा है?

सच बोलूं तो, चाहे कितना भी मुस्कुराकर कुछ भी नहीं बोलूं, असलियत में मुझे यह बोलना है कि हम बच्चा नहीं चाहते हैं| हाँ, मेरे पति और मैंने पहले से ही सोचा था कि हमे  अपना  बच्चा नहीं चाहिए| थोड़े साल बाद हमने पुणे में एक छोटी लड़की को गोद ले लिया|

यह दो साल तक चला, जिसके बाद मुझ में मातृत्व की  भावनाएं पैदा होने लग गयीं| शादी के चार साल के बाद हमने तय किया कि माता-पिता बन जाये और सबको यह खुशखबरी दें जिसका सब इंतज़ार कर रहे थे|

हमे मालूम नहीं था यह करना बहुत मुश्किल होगा| जब मैं स्कूल में थी, तो मुझे लगता था कि लड़के के हाथ पकड़ने से ही मैं गर्भवती बन जाऊँगी| मैं कितनी भोली थी!

मैं और मेरे पति ने कन्सीव करने की  कोशिश की, हमारे लिए यह  बहुत मुश्किल था| विशेषज्ञ दिखाते दिखाते  दो साल निकल गए | अभी तक हम अमरीका में थे जहाँ इनफर्टिलिटी  को नीची नज़रों से नहीं देखा जाता और किसी की गलती नहीं मानी जाती है| कई टेस्ट्स के बाद यह देखा गया कि  कुछ गलत नहीं है और हमे अपनी व्यस्त कार्य जीवन से आराम करना चाहिए और फिर से कोशिश करनी चाहिए|

यह सुनकर मैं बहुत शांत हो गयी, लेकिन कोशिश करते रहने से तनाव में आ गयी| जब मैंने इसके बारे में सोचा, तो मन में सवाल आये कि “अगर कुछ गलत है तो क्या होगा?”. किसकी गलती है? क्या इनफर्टिलिटी को सही नज़र से देखना नहीं चाहिए? क्या हमे एक दुसरे को गलत ठहराना चाहिए या फिर हमे एक साथ मिलकर स्थिति को सुलझाना चाहिए?

जब मैं  हाल ही में, भारत वापिस आयी तो देखा कि इनफर्टिलिटी यहाँ स्वीकार्य नहीं  है| हमारे देश में ज़्यादातर इनफर्टिलिटी के लिए औरत को ही जिम्मेदार माना  जाता है | असलियत में, आदमी में  कम शुक्राणु हो सकते है और वह भी इन्फेरटाइल  हो सकता  है|

इस सच्चाई के वावजूद  सारी बुरी चीज़ें औरतों को  सहनी पड़ती हैं चाहे उसका दोष न भी हो |

आईयूआई,, आईवीएफ, और सरोगेट जैसे उपचार को खुलकर  चर्चा नहीं की जाती  है, जैसे कि  हम लोग कुछ बुरा कर रहे हैं| मुझे लगता है, अब समय आ गया है कि  जहाँ बीवी और पति जो मानसिक तौर से थक जाते हैं , उन्हें मदद मांगनी चाहिए  और “लोग क्या कहेंगे और क्या सोचेंगे” के अलावा वैकल्पिक तरीकों के बारे में सोचना  चाहिए|

हमे औरतों को परिवार का नाम आगे न बढ़ाने वाली समझकर  बुरी नज़र से  देखना बंद करना होगा |  मुझे लगता है कि अब वक़्त आ गया है कि  हम सोंचे  कि गलती किसी की भी नहीं है|

गर्भवती होना कई लोगों के लिए बहुत आसान है, और कई लोगों के लिए बहुत ही जटिल और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। इसलिए, मेरा  सबसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया उन जोड़ों से मत पूछो, जिनकी शादी को कुछ साल ही हुए हैं, कि उनके बच्चे क्यों नहीं हैं?  शायद इसमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक या वित्तीय चुनौतियां होंगी|

अगर वे कभी भी ‘अच्छी खबर’ नहीं देना चाहते हैं, तब भी  उनके फैसले का सम्मान करें।

मेरे आई यूआई के कई असफल प्रयासों के बाद, मैंने और मेरे पति ने आखिरकार अपने परिवार को अच्छी खबर दी और हमारी छह साल की बेटी का  हमारे जीवन में स्वागत किया |

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