4-व्यायाम-जो-बच्चों-की- शारीरिक-शक्ति-बढ़ाएं

बच्चों को देख कर ये लगता है मानो  वो कुछ नहीं कर रहें हों क्योंकि वो सारा दिन बिस्तर पर लेटे रहते हैं और लेट के खाना खाते हैं । पर माँ-बाप ये नहीं समझ पाते की बच्चों का हाथ-पैर मारना, शोर मचाना, रोना उनके शारीरिक विकास को मज़बूत बनाने में उनकी सहायता करता है । इस तरह से प्रकृति शिशु को तंदरूस्त, सक्रिय व  मानसिक रूप से मज़बूत बनाने में मदद करती है।

इसके अलावा व्यायाम उनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है। बस इतना ध्यान  रखें की उनको एक ही तरह की एक्टिविटीज में व्यस्त न रखें । प्रतिदिन एक प्रकार की कसरत से  बच्चों का भी मन  ऊब जायेगा और उन्हें उसे करने का जोश नहीं रहेगा । आज कल  लोगों की  जागरूकता व आधुनिक रहन-सहन, खान-पान और सोच के कारण , उनकी ज़िम्मेदारियों में भी तब्दीलियां आई हैं। हम आपको बच्चों के लिए कुछ आसान और हलके-फुल्के व्यायाम बताएँगे जो आपके शिशु भी बिना किसी स्ट्रेस या मुश्किल के कर पायेंगे  ।

  1. टमी एक्सरसाइज

बच्चे ज़्यादातर वक्त अपनी पीठ के बल लेटे रहते हैं । वैज्ञानिकों ने  शोध में पाया है की बच्चों को पेट के बल लिटाने से उनकी गले, हाथों , कंधे , पीठ और पेट की मांसपेशियां  मज़बूत बनती हैं  । इसके लिए रोज़ाना 3  से 5  मिनट काफी होता है । बच्चों के साथ आप भी पेट के बल लेट सकती हैं । साथ ही आप बच्चे को गाना सुना सकती हैं और उसके साथ खेल सकती हैं । बच्चे के साथ बच्चा बन जाइये और देखिये की वो कितना उत्साहित होकर भाग लेगा। बच्चों के साथ मखेलने से बच्चें को भी कंपनी मिल जाती है । शुरुवात में बच्चे  टमी एक्सरसाइज से दूर भागेंगे पर कुछ दिनों में वे आपके साथ इसे करने लगेंगे । धीरे-धीरे उनकी ताकत बढ़ेगी और धैर्य भी बढ़ेगा । बाद में आप इसे लम्बे समय के लिए कर सकती हैं ।

 2. वेटलिफ्टिंग यानि वाले व्यायाम

 

छोटे बच्चे  डम्ब-बेल्स तो नहीं उठा सकते हैं पर उनके बॉडी वेट के हिसाब से छोटी-मोटी चीज़ें  उठा सकते हैं । इन्हे उठाने से बच्चों के हाथों की मांसपेशियों  मज़बूत बनेंगी । इस तरह से वे अपने शरीर के हिस्सों के बीच का ताल-मेल बेहतर रूप से समझ पायेंगे । शुरुवाती दिनों में बच्चों से छोटे-मोटे डिब्बे, या कूड़ेदान  उठवाइये । बाद में वे खुद ही भरी सामान को उठाने लगेंगे ।

3. सिट-अप्स  यानि  उठक – बैठक

 

बच्चों के हाथों के अतिरिक्त , उनके पैरों को भी शक्ति प्रदान करना  ज़रूरी होता है । बैठने से पैरों की मांसपेशियाँ  विकसित व मज़बूत होती हैं ।  इस से न ही उनके पैर  बल्कि पीठ, कूल्हों और झांघों को भी मज़बूती मिलती है ।  बच्चे इस क्रिया से अपना शारीरिक संतुलन भी बढ़ाते हैं । इससे पेट की कोशिकाएं भी सक्रिय हो जाती है । कुछ मामलों में ये बच्चों को कब्ज़ से भी निजात दिलाता है ।

 4. साइकल चलाना

 

हमारी नानी-दादी ने कभी न कभी हमे हमारे शिशु के पैरों को साइकिल समान घुमाने की सलाह दी होगी । क्या आप जानते हैं क्यों ? कारण है बच्चों के पेट की गैस निकालना । ये प्राकृतिक तरीका है पेट की गैस को कम करने का। साथ ही इससे उनके पैरों , झांघों, घुंटनों  और कूल्हों की भी अच्छी  कसरत होती है ।बच्चों को खिलौने वाली प्लास्टिक की छोटी  साइकिल  खरीद दें । इसके बाद उन्हें उसमे बैठाइये । इस प्रकार उनके शरीर में लचक आएगी और वो  आसानी से हिल-डुल  सकेंगे ।

ध्यान रखिये की बच्चों  पर ज़रूरत से ज़्यादा बोझ मत डालें । उतना ही व्यायाम करवाएं जितना के उनका शरीर झेल सके । अधिक शारीरिक श्रम बच्चों को कमज़ोर या बीमार बना  सकता है । गौर कीजियेगा की आपका प्यारा शिशु मुस्कुरा रहा हो, हाथ-पैर हिला पा रहा हो, बिना कठिनाई साँस ले रहा हो, आपको देख रहा हो । अगर आप कुछ भी शंकाजनक पाएं  तो बच्चे को व्यायाम न करवायें । किसी भी चीज़ की अति हानिकारक होती है,इसीलिए  बच्चे कि उम्र, क्षमता और वज़न के हिसाब से ही व्यायाम करवायें  ।

 पौष्टिक खान पान और उचित नींद को मत भूलियेगा ।  “ स्वस्थ्य रहें , मस्त  रहें ”

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