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अक्सर हम सोचते रह जाते हैं कि ये नन्ही सी जान के दिमाग में क्या चल रहा होगा ।  गोद  पर  लेने के बाद भी जब हम उन्हें  परेशान देखते हैं तो  यही  सोचते हैं कि कहीं हम उन्हें नापसंद तो नहीं, या फिर इन्हे किसी और की गोद में जाना है। तो आइये इन सारे प्रश्नो का जवाब ढूंढते हैं, शिशुओं  के संकेत समझकर।

1. आँखों में देखना

शिशुओं की आँखें आकर्षण का संकेत हैं । अक्सर बच्चे, खासकर कुछ हफ़्तों के, लम्बे समय तक माँ के आँखों में घूरते है। वो यह बताने की कोशिश करते हैं की वे कम्फर्टेबल हैं और आपको और अधिक जानना चाहते हैं। वो आपके चेहरे को पढ़ने की कोशिश करते हैं। ये उनका तरीका होता है उन चीज़ो से घुलने मिलने का जिनसे उनको प्यार और राहत मिलती है।    

2. मुस्कुराना

6 से 8 हफ़्तों के बीच, बच्चे मुस्कुराने लगते हैं, कुछ उद्देश्य के साथ । दिल को पिघलाने वाली उनकी मुस्कुराहट प्यारी होती है। वो बस आपको देखकर या आपकी आवाज़ सुन कर खुश हो जाते हैं। ये इस बात को दर्शाता है की वो औरों की अपेक्षा आपके साथ खुश हैं क्योंकि आप उनकी ज़रूरतों को बेहतर समझ पाती हैं। उत्तर में यदि आप भी मुस्कुराएं तो आपके और शिशु के सम्बन्ध मज़बूत होते जायेंगे ।

3. पहचानना

मनोवैज्ञानिक शोधों में पाया गया है की जन्म के कुछ हफ़्तों में ही शिशु अपने प्रथम रक्षक और स्नेहदाता को पहचानने का प्रयास करते हैं ।  इसमें मूल रूप से माँ और पिता का नाम आता है ।  इसे आप यूं समझ सकती हैं की जब आप और कुछ लोगों के साथ शिशु को दुलारने की कोशिश करेंगी तो शिशु सर्वप्रथम आपको ही पहचानेगा ।  ऐसा इसलिए क्योंकि शिशु आपकी शक्ल और आवाज़ से परिचित है ।  कोई और शिशु को सहलायेगा या खिलायेगा तो भी शिशु आपकी तरफ देखता रहेगा ।

4. बच्चों का आवाज़ें निकालना

बच्चे अजीबोगरीब किस्म की आवाज़ें निकालते हैं ।  बच्चे जिनसे लगाव रखते हैं उनके सामने और भी ज़्यादा आवाज़ निकालते हैं ।  बच्चों के शोर मचाने और आपके देखकर उत्साहित होने को आप खुद के प्रति सकारात्मक संकेत समझिये ।

5. बच्चों का आपको चूमना

बच्चों के गाल और माथे पर चूमिये ।  आप उनकी उंगलियों और पैरों को चूमिये ।  ऐसा अक्सर करने से बच्चे को आपके प्यार का आभास होगा ।  वह आपके प्यार का कायल हो जायेगा ।  धीरे धीरे वो भी आपके प्यार को चुम्बन से जवाब देगा ।

 

6. बच्चों की मिमिक्री करें 

बच्चों को गोद में लेकर, या कुर्सी पर बैठाकर या फिर बिस्तर पर लिटाकर उन्हें गुदगुदी करें ।  उनके जैसे चेहरे बनाएं ।  बाद में बच्चे भी इसके आदि हो जायेंगे ।    वे आपके आने पर आप जैसे चेहरे बनाएंगे ।  इसमें आप हैरान मत होइएगा ।

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