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बिस्तर गीला करने को अंग्रेजी में बेड-वेटिंग कहते हैं। विज्ञान में इसे एनुरेसिस कहते हैं। इसका अर्थ यह है की जिन बच्चों को शौचालय जाना सिखाया जाता है वे अनजाने ही नींद में बिस्तर पर मूत्र त्याग कर देते हैं। यह 7 वर्ष और उससे कम उम्र के बच्चों में आम बात होती है। पर कभी-कभार ये किशोर उम्र के बच्चों में भी हो सकता है। कुछ बच्चे दिन में भी बिस्तर पर मूत्र त्याग कर सकते हैं। यह स्ट्रेस या चिंता के कारण भी हो सकता है। अगर आपका बच्चा भी इस समस्या से ग्रसित है तो हम  कुछ महत्वपूर्ण बातें बताना चाहेंगे।

बिस्तर गीला करने का कारण

1. यह इसलिए होता है क्योंकि बच्चे नींद के बीच शौचालय जाने का संकेत महसूस नहीं कर पाते। उनके दिमाग में इसका संकेत ठीक से कार्य नहीं कर पाता है।

2. कुछ बच्चे ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वे गहरी नींद सो जाते हैं और नींद के बीच उठ नहीं पाते जबकि उनका मूत्राशय पूरी तरह भर जाता है।

3. कुछ बच्चों का मूत्राशय छोटा होता है जिस कारण वे ज़्यादा मूत्र पैदा होने तक शौचालय नहीं जा पाते।

4. बिस्तर गीला करने की शिकायत जेनेटिक हो सकती है यानि अगर घर में माँ-बाप, दादा-दादी या नाना-नानी को इसकी शिकायत थी तो बच्चे को भी समस्या हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं की आप खुद को दोष दें।

5. जिन बच्चों में खुद के प्रति ध्यान केंद्रित करने की समस्या होती है वे अक्सर बिस्तर गीला कर देते हैं। इसे अटेंशन डेफिसिट हायपर-एक्टिविटी डिसऑर्डर भी बोलते हैं।

6. ध्यान देने योग्य बात यह है की बच्चे जानबूझ कर बिस्तर गीला नहीं करते। इस मुश्किल का हल पाने के लिये आप कुछ उपचार अपना सकती हैं।

बिस्तर गीला होने से कैसे बचें ?

1. बच्चों को नींद से उठाकर शौचालय ले जा कर मूत्र त्याग में मदद करें। जब बच्चा आधी नींद में होता है तब आप उसे उठायें। इसके लिये आप एक समय निर्धारित कर लीजिये। आप खुद सोने जाने से पहले बच्चे को टॉयलेट भेजना न भूलें।

2. रात को सोने से पहले बच्चे को ज़्यादा तरल पदार्थ न पिलायें।

3. बच्चों को ज़्यादा से ज़्यादा पानी दिन में पिलायें। इससे वे पानी की कमी के शिकार नहीं बनेंगे।  

4. रात में बच्चों को कैफीन से बने तरल पदार्थ न दें। इसे बच्चों में ज़्यादा मूत्र पैदा होती है।

5. बच्चों के बिस्तर के लिये वॉटर-प्रूफ चादर का प्रयोग करें।

6. आप बच्चों को फोल्डिंग पर सुला सकती हैं जिसमे पहले से ही वॉटर-प्रूफ मटीरियल लगा होता है।

7. आप बच्चे को डायपर पहना कर सुला सकती हैं।

8. बच्चों को दिन में जब पेशाब जाना हो तब उन्हें पेशाब रोकने के लिये बोलें जब तक के रोकना नामुमकिन हो जाये। इससे उनकी मांसपेशियाँ मज़बूत बनाने में सहायता मिलेगी।

9. ऑलिव आयल की मालिश। आप ऑलिव आयल को हल्का गर्म करें। फिर बच्चे को पास बुलायें। उसे लेटा कर पेट और उसके निचले हिस्से में हलके हाथों से मालिश करें। इसे आप दिन या रात में अपनी सुविधानुसार कर सकती हैं। मालिश करने से रक्त-संचार बेहतर होता है और शरीर के मांशपेशियों को शक्ति व राहत मिलती है।

खाने की चीज़ें बच्चों को दे सकती हैं
1. दालचीनी

बच्चे को दालचीनी की छोटी ऊँगली भर डंठल चबाने को कहें। आप दालचीनी और चीनी को पीस कर दूध के साथ या ब्रेड जैम के साथ बच्चे को दे सकती हैं जिससे उन्हें इसे सादा खाने में दिक्कत न हो।

2. आँवला

वर्षों पुरानी इस तरकीब को हम अनदेखा नहीं कर सकते। आप आँवला के बीज निकालकर उसे थोड़ी हल्दी और एक चम्मच शहद के साथ दे सकती हैं। ये मिश्रण बेड-वेटिंग कम करने में मदद पहुँचाता है।

3. करौंदे यानि क्रैनबेरी का जूस

क्रैनबेरी यूरिनरी सिस्टम के लिये बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इसे कई आयुर्वेदिक और हर्बल दवाइयों में डाला जाता है। आप ताज़ा करौंदे को पीस कर उसका ताज़ा जूस बच्चे को पिलाइये। इससे उसका मूत्राशय और उससे सम्बन्धित नसें मज़बूत होंगी। बच्चों को रोज़ाना देने से ही उनमें बिस्तर गीला करने की शिकायत से छुटकारा मिलेगा। अगर वह किसी संक्रमण से पीड़ित है तो आप उसे 150 मिलीलीटर जूस यानि आधा कप जूस दिन में तीन बार पिलायें।

4. अखरोट और किशमिश

बच्चों को  दो अखरोट और 5 किशमिश रात में सोने से पहले दें। इसे कुछ हफ़्तों तक दे कर देखिये। यकीनन उनके बिस्तर गीला करने के व्यवहार में घटौती आयेगी।

अगर आपको लग रहा है की बच्चा ज़रूरत से ज़्यादा बिस्तर गीला करता है तो आप उसे डॉक्टर के पास ले जायें और इलाज करवायें। बच्चों से बात करना मत भूलें। उनसे बिस्तर गीला करने का कारण पूछें। ये जानने की कोशिश करें की क्या वे किसी मानसिक पीड़ा से गुज़र रहे हैं।

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