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गर्भावस्था में असंतुलित शुगर लेवल्स के कारण महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज़ हो जाता है। यह अक्सर बच्चे की डिलीवरी के बाद अपने आप ठीक हो जाती है। परन्तु कभी-कभी यह डिलीवरी के बाद भी महिला के शरीर में रह जाती है। सामान्य रूप से, पेट आपके लिए भोजन को, ग्लूकोज़ के रूप में सोक लेता है। इस तरह ग्लूकोज़ वाला भोजन रक्त के बहाव में जाकर हमें पोषण प्रदान करता है। शरीर के सेल्स इन्सुलिन नामक हॉर्मोन की मदद से ग्लूकोज़ को सोक पाते हैं। परन्तु इन्सुलिन की कमी के कारण शरीर में ग्लूकोज़ सही रूप में उपयोग नहीं हो पाता है। गर्भावस्था में डायबिटीज़ होने से आप जो खाना खाती हैं वो शिशु को पोषण के रूप में नहीं मिल पाता। 

आपको गर्भावस्था में डायबिटीज़ होने का खतरा कितना है?

1. अगर आपके घर में किसी बुज़ुर्ग महिला को पहले कभी गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज़ हुई है तो आप को भी हो सकती है। आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सही दवाइयाँ लेने से यह काबू में आ जाती है। 

2. अगर आपका वज़न सामान्य से कहीं अधिक है तो जेस्टेशनल डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है। आपको अपने वज़न का ध्यान रखना पड़ेगा।  अगर आपकी BMI 30 से ज़्यादा है तो आपको अपना ध्यान रखना होगा।

3. अगर आपको पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम है जिसे (पी.सी.ओ.डी) है। वैसे ये आज कल आम रोग बन गया है। इसका कारण है आज कल का आधुनिक रहन-सहन व खानपान।

4. अगर आपको गर्भावस्था से पूर्व डायबिटीज़ की शिकायत रही हैं।

गर्भावस्था में होने वाले डायबिटीज़ के लक्षण 

1. अत्यधिक भूक लगना। 
2. अत्यधिक प्यास लगना।
3.धुंधला दिखाई देना।
4. चक्कर आना।
5. अक्सर पेशाब करने जाना।

वैसे गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज़ के कोई ख़ास लक्षण नहीं होते, पर जब आप 24 से 28 हफ्ते की गर्भवती होती हैं तब आपके सम्पूर्ण स्वास्थ्य चिकित्सा के दौरान आपके डॉक्टर आपको इसके बारे में बताएँगे।

आप जेस्टेशनल डायबिटीज से कैसे बच सकती हैं?

1. संतुलित आहार लें, जैसे-अंकुरित दाल, बीन्स, स्प्राउट्स, ताज़ी हरी सब्ज़ियाँ, मछली, अंडा इत्यादि।
2. समय पर सोने और समय पर जागने का प्रयास करें।
3. व्यायाम करें, जैसे- चलना-फिरना, बॉडी स्ट्रेच।
4. योग आसन जिन्हे आसानी से किया जा सके।
5. तनाव से दूर रहें।

 जेस्टेशनल डायबिटीज़ का गर्भावस्था पर क्या असर होता है?

1. इसके कारण कोई गंभीर मुश्किल तो नहीं होती परन्तु कभी-कभी कुछ महिलाओं को प्रीटर्म-लेबर की तकलीफ हो जाती है।
2. जो बच्चे नौ महीने के पूर्व जन्म लेते हैं वे अन्य शारीरिक रोगों के शिकार हो सकते हैं। उनका शरीर सामान्य शिशु की तुलना में अधिक बड़ा होता है। उनका कंधा जन्म देने वाली नली (बर्थ-कैनाल) में फंस सकता है। उनके गले और कंधे पर गंभीर चोटें आ सकती हैं। उन्हें सीज़ेरियन सेक्शन से पैदा किया जाता है। उन्हें जन्म-पश्चात एक्स्ट्रा केयर और देखभाल की ज़रूरत होती है।
3. आपको  भी बच्चे के जन्म के बाद उच्च रक्तचाप और कमज़ोरी की शिकायत हो सकती है।
4. ऐसे शिशु को खून की कमी और साँस लेने में दिक्कत हो सकती है।

 जेस्टेशनल डिबेट्स के बावजूद स्वस्थ्य डिलीवरी कैसे करें?

इसके लिये आप, डॉक्टर की बताई सलाह का पालन करें। खुद को जेस्टेशनल डायबिटीज की रोगी मानकर आप निराश न हों। ये जानलेवा नहीं है। और डिलीवरी के बाद आप फिर से नॉर्मल हो जायेंगी।

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