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नवजात बच्चे के माता-पिता का, बच्चे के दूध पीने की आदत को लेकर चिंतित रहना सामान्य बात है| आपको लगेगा कि आप बच्चे को कम दूध दे रहे हैं, या बहुत ज्यादा! यह ख्याल आपको परेशान करता होगा|

 

हम आपकी इस चिंता को कम कर सकते हैं| यहाँ एक सामान्य सूचि दी गयी है, जिससे अधिकतर पोषण विशेषज्ञ सहमति रखते हैं|

नवजात शिशु का पहला महीना

पहले कुछ दिनों तक आपका बच्चा, दिन भर में बस कुछेक बार ही दूध पीना चाहेगा|

पहले सप्ताह के अंदर ही धीरे-धीरे आपको पता लग जायेगा कि आपका बच्चा करीब-करीब 8 बार एक दिन में दूध लेता है जो 60-120ml दूध होता है|

नवजात शिशु एक बार दूध पीने में करीब 40 मिनट्स लेते हैं, जबकि बड़े बच्चे ज्यादा कुशल होते हैं, और वह करीब 15-20 मिनट में दूध पी लेते है| यह जरुरी है कि पहले महीने में जब भी आपके बच्चे को भूख लगे, आपको उसे दूध पिला देना चाहिए |

मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा बच्चा भूखा है या नहीं?

आपका बच्चा अपनी कुछ हरकतों से बताएगा कि वह भूखा है| चूसने की गति, सर को घुमाना या फिर वह रो कर भी आपको बता सकता है| जितना दूध आपका बच्चा पीयेगा, आपका शरीर उतना ही दूध बनाता जायेगा| आपके बच्चे का रात में ज्यादा दूध पीना सामान्य है|

अगर आपके बच्चे का वज़न घट रहा है तो यह ज़रूरी नहीं कि इसका कारण अपर्याप्त दूध पीना है| नवजात बच्चे सामान्यतः अपने वज़न का 10% अपने जन्म के कुछ दिनों में खो देंते हैं| फिर भी कुछ दिनों में उन्हें अपना वज़न बढ़ाना शुरू कर देना चाहिए|

1-4 महीने के शिशु

 

इस उम्र के बच्चे सामान्यतः हर 2-3 घंटे में दूध पीते हैं, जो हर दिन में 120-210ml की मात्रा होती है| यह मात्रा ब्रैस्ट फीडिंग शिशु के लिए सही है| डब्बे के दूध पीने वाले शिशु 120-150ml दूध पीतें हैं, जो वो हर 2-3 घंटे में लेते हैं , और जब वो 3-4 महीनो के होते हैं, तो वह औसतन 150-210ml दूध हर 2.5-3.5 घंटे में लेते हैं| इस उम्र में अपने बच्चे को ठोस आहार देना जोखिम भरा काम हो सकता है क्यूकि अभी भी उसके मुँह और गले की मांसपेशियां पूरी तरह से विकसित नहीं होती हैं|

4-6 महीने के शिशु

जब आपका बच्चा 6 महीने का हो जाता है, तो वह सामान्यतः 1 लीटर दूध पीने लगता है| यह वह समय होता है जब बच्चे के माँ -बाप उसे ठोस आहार देना पसंद करते हैं| यहाँ यह ध्यान देने की बात है, कि ठोस आहार देने का मतलब यह बिलकुल नहीं है कि आप उसे दूध पिलाना बंद कर दें| ठोस आहार की शुरुआत प्यूरी और मसले हुए भोजन से करें, जिसे आप बच्चे को एक-दो बार दिन में दें| आहार की मात्रा बच्चे की चाहत पर छोड़ दें कि वह इसे कितना खाना चाहता है| जब उसका पेट भर जायेगा तो आप पायेंगे कि वह अपना सर घुमा कर या जीभ से खाना बाहर निकाल कर इसका संकेत दे रहा है| यह मात्रा 1-3 टेबल स्पून की हो सकती है| बच्चे को स्तनपान हर 2-4 घंटे में करातें रहें|

6-8 महीने के शिशु

इस उम्र में बच्चे को बोतल का दूध / स्तनपान करातें रहें| इसके साथ -साथ बच्चे को सेमी-सॉलिड आहार दिन भर में 2-3 बार दें| अब इन आहार की मात्रा लगभग 4-8 टेबल स्पून होनी चाहिए| यह आहार सामान्यतः फलों, सब्जियों और अनाजों का होता है| बच्चे को हर 3-4 घंटे में स्तनपान /बोतल से दूध पिलाना जारी रखेँ|

8-10 महीने के शिशु

इस उम्र में बच्चे को प्रोटीन से भरे खाने से परिचित करा सकते हैं| अच्छा ये रहेगा कि बच्चे को आहार कम से कम 3 बार हर दिन में दिए जाएँ ताकि खाने के इस पैटर्न को स्थायी किया जा सके | आप अपने बच्चे को उसके इच्छानुसार खिला सकते हैं, क्यूकि अब आपको पता चल जायेगा, कब उसका पेट भर जाता है |

10-12 महीने के शिशु

अपने बच्चे को दिन भर में 3 बार आहार देना जारी रखें| बच्चे को 4-5 घंटे में स्तनपान कराती रहें| अपने बच्चे को उसके भूख के अनुसार, आहार देतीं रहें |

टिप्स :

1. अपने बच्चे के दिए गए संकेतो पर नज़र रखें कि बच्चे को पर्याप्त मात्रा में खाना मिल रहा है या नहीं?

2. आम तौर पर, पहले दो दिनों में आपके बच्चे को 2-3 नैप्पीज का उपयोग कर लेना चाहिए| इसके बाद आपके बच्चे को 6 डायपर हर दिन चाहिए होते है|

3. उसका यूरिन फीका और बिना गंध के होना चाहिए|

4. उसकी पॉटी पीली होनी चाहिए|

कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो आपको बता सकें कि बच्चे को पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा, उसपर ध्यान दें|

अगर आपका बच्चा 2 सप्ताह में वज़न नहीं बढ़ा रहा हो तो संभावना है कि उसे पर्याप्त दूध नहीं मिल रहा है| दूसरा संकेत है कि बच्चा 6-8 से कम डायपर का उपयोग कर रहा है या दिन भर में 2-3 से कम पॉटी कर रहा है| हर समय नींद में रहना भी अपर्याप्त पोषण की तरफ इशारा देता है| इन संकेतो को देखकर अपने डॉक्टर से सलाह लें| 

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