शिशुओं-दाँतों-की-देखभाल-xyz

शिशुओं के लिए दाँतों की देखभाल

वह प्यारा लम्हा जब आप अपने बच्चे के पहले दाँत को आते हुए देखते हैं और अपने बच्चे का वह उत्साह जब वह कहते है कि “ मां मेरा दाँत हिल रहा है”।हर माता-पिता को यह पल याद होंगे। बच्चे के दाँतों की देखभाल उतनी ही ज़रूरी हैं, जितना की शरीर के बाकी अंगों की। मुंह से गंध आना और ज्यादा मीठे का सेवन करने से सढें हुए दाँत देखना, निश्चित रूप से कोई सुखद दृश्य नहीं होगा।यह आपके लिए जरूरी है की आप अपने बच्चे के मुंह और दाँतों को साफ रखें।

यह है कुछ बातें की कैसे आप अपने बच्चे के दाँतों को स्वस्थ बनाए रख सकते हैं।

दाँतों के डॉक्टर(डेंटिस्ट)के पास ज़रुर जाए – अपने बच्चे को उनके पहले जन्मदिन से पूर्व डेंटिस्ट के पास ज़रुर लें जाए क्योंकि इस समय तक बच्चे के मसूड़ों से दाँत बढ़ने शुरू हो जाते हैं। इसलिए जितना जल्दी हो उतना बेहतर है,यह बात कही जाती है क्योंकि इस समय बच्चे के दाँत बढ़ने की प्रक्रिया में होते हैं। डेंटिस्ट मौखिक परीक्षण (oral examination) करने में सक्षम होंगे जिसके द्वारा वह बच्चे के दाँतों की वृद्धि का पैटर्न पता कर पाएंगे। डेंटिस्ट यह बताने की स्थिति में भी होंगे की किस तरीके से ब्रश करना है और किस प्रकार के ब्रश का इस्तेमाल करना है। जांच की मदद से कैविटी और प्लैक(plaque) की शुरूआत से भी बचा जा सकता है।

दाँतों को साफ (brushing) करने का सही तरीका – ब्रश करना अनिवार्य है और इसकी शुरुआत आपको तभी कर देनी चाहिए जब आप मसूड़ों से दाँतों को निकलते हुए देखें। जब आप यह ध्यान दें की दाँतों के बढ़ने की शुरुआत हो चुकी है, तो आप एक कपड़े को भिगोकर बिना बच्चे को तकलीफ़ दिए हल्के हाथों से उनके मुंह और मसूड़ों को साफ कर सकती हैं। जैसे- जैसे समय बितेगा। आप एक मुलायम दाँतों के ब्रश का इस्तेमाल कर सकती है,जो खासतौर पर बच्चों और शिशुओं के लिए डिज़ाइन किया जाता है। एक बार जब दाँत मसूड़ों से बाहर निकल आए और मजबूत हो जाएं। तब आप उन बच्चों के लिए डिज़ाइन किया ब्रश इस्तेमाल कर सकती हैं जिन्होंने शैशवकाल को पार कर लिया है। यह आकार में बहुत छोटे होते हैं और इसमें मटर के दाने जितने थोड़े से पेस्ट की आवश्यकता होती है। आप अपने बच्चे के लिए फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करते होंगे,यह सोचकर की यह बच्चे के दाँतों के लिए बेहतर है। तो अगर आप अगली बार अपने बच्चे के लिए टूथपेस्ट लें, तो ऐसा टूथपेस्ट ख़रीदे जो न निगला भी जा सकें। अपने बच्चे को दिन में दो बार ब्रश अवश्य करवाए क्योंकि यह दाँतों को स्वस्थ बनाए रखता है।

जूस का सेवन कम कर दें – हालांकि यह सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता है। लेकिन जूस दाँतों के खराब होने और सड़ने का कारण भी बनता है। अगर सही प्रकार से कुल्ला ना किया जाए तो इसके कण दाँतों में ही रह जाते हैं जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं। जिसके कारण दाँतों में दर्द और बाद में दाँत सड़ने लगते हैं।

दूध पिलाने की बोतलों और सिप्पी कप का इस्तेमाल ना करें – जब आपके बच्चे के दाँत निकलने शुरू हो जाएं तो दूध की बोतलों का इस्तेमाल बंद कर दें क्योंकि इससे दाँतों में सड़न की संभावना बढ़ती है। मीठे तरल जैसे दूध, जूस और फार्मूला तक भी शिशु को बोतल द्वारा नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि इसके बचे हुए कण काफी देर तक दाँतों में बने रहते हैं जिससे बैक्टीरियल संक्रमण और दाँतों में सड़न का खतरा बना रहता है।

Leave a Reply

%d bloggers like this: