swasthy-shishu-ke-7-lakshan-Zindagi

हर माँ उस भावना को महसूस कर सकती है जब उसके बच्चे का रोना उसे किसी समस्या का संकेत देता है। वह समझ नही पाती की शिशु क्यों रो रहा है? क्या आप भी नई माँ हैं जो की शिशु के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं? क्या आप उसके चुप होने पर चिंतित हो जाती हैं? क्या आप उसके सही और सेहतमंद विकास के लक्षण जानना चाहती हैं? क्या आप को लगता है की बाकी माँयें भी इस दुविधा से गुज़रती होंगी? या आपको लगता है की कहीं आप कोई गलती तो नहीं कर रहीं हैं? क्या आप वह स्वस्थ्य है या नही यह जानना चाहती हैं तो इस ब्लॉग को ज़रूर पढ़ें। इस पोस्ट में स्वस्थ्य शिशु के 7 लक्षण के बारे में हम आपको जानकारी देंगे।

1. आपका शिशु बिना सहारे के खड़ा हो पाता है

जब आपका शिशु एक महीने का हो जायेगा तब वह खुदका सर बिना किसी सहारे के खड़ा रख पायेगा। यह उनकी गले, पीठ व सर की नसों के विकास का संकेत है।

2. आपका शिशु अपने आस-पास के माहौल से घुलने-मिलने लगता है

आपका शिशु एक माह का होने पर आपको देखने लगता है। पहले हफ्ते में वह आपकी उंगलियां पकड़ने लगता है। तीन माह का होने पर वह मुस्कुराने लगता है और धीरे धीरे हंसने भी लगता है। शायद आपका शिशु घर के अन्य सदस्यों को इशारा भी देगा उसे उठाने के लिए।

3. आपके शिशु को अधिक खुराक चाहिए

आपके शिशु के पेट का आकर एक टमाटर के जितना होगा जिस कारण वे कम खाते हैं व अक्सर लैट्रिन करते हैं। दिन में 12 बार उन्हें खिलाना आम बात हो जाती है। परन्तु जैसे जैसे उनका विकास होता है, वैसे वैसे उनके पेट का आकार बढ़ता है और वे पहले की तुलना अधिक भोजन करते हैं। धीरे धीरे आप उन्हें ठोस खाना खिला सकती हैं जिससे उन्हें बार बार खिलाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही आप उन्हें तरल पदार्थ देना भी कम कर सकती हैं।

4. आपका शिशु दिन में 16 घंटे सोता है

शिशु के जन्म के बाद उसे लगातार नींद नही आती। पर बाद में उन्हें मिनिमम 16 घंटे नींद लेना आवश्यक होता है। चौथे महीने से शिशु दिन में 4 घंटा सो पायेगा।

5. शिशु के डायपर दिन में 8 से 10 बार बदलने पड़ेंगे

अगर आपके शिशु को दिन में 8 से 10 डायपर बदलने पड़ें तो आप निश्चिन्त रहें। यह सामान्य है। उनके डायपर अधिक गीले इसलिए होते हैं क्योंकि उन्हें ज़्यादातर लिक्विड डाइट दी जाती है जैसे की दूध और फॉर्मूला फ़ूड।

6. आपका शिशु किसी अनचाही आवाज़ से दूर होने का प्रयास करता है

जब कोई शोर, रोने, धमाके, कूकर की सीटी, गाडी के हॉर्न, जानवर का भौंकना सुनाई देता है तब आपका शिशु वह आवाज़ें सुनता है और अपना मुँह दूसरी तरफ कर लेता है। यह उसके विकसित होते कानों की तरफ संकेत देता है। वह अपनी माँ की पुकार व गैर इंसान की हंसी के बीच भेद करने लगता है।

7. आपका शिशु चीज़ों व आवाज़ों पर गौर करने लगता है

जन्म से लेकर एक माह तक शिशु 12 इंच तक ही देख पाता है। लेकिन दो महीने के बाद वह 18 इंच तक देखने लग जाता है। वे अपने आस पास के माहौल से अधिक परिचित होने लगेगा। वह चौकन्ना होने लगेगा और लोगों, चीज़ों व आवाज़ों को पहचानने लगेगा।

आप माँ की भूमिका भली-भाँती निभा रही हैं। हर माँ का सफर अनुपम व अनूठा होता है। सो आप अपने मातृत्व का आनंद लें। अगर आपको पोस्ट पसंद आया हो तो इसे अन्य माताओं के साथ शायर करें।

 

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