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बहुत लोगों का मानना है की भाई-बहनों को एक दूसरे से छोटा-बड़ा होने से बच्चे के आव-भाव पर असर पड़ता है, लेकिन रिसर्च से साबित हुआ है की ऐसी पुरानी सोच हमेशा लागू नहीं होती|


लैपज़िग यूनिवर्सिटी ने यूऐसए, जर्मनी और यूके से 20,000 लोगों के जन्म होने के आर्डर की जांच की| उन्होंने प्रतिभागियों की छान-बीन उनकी बुद्धि का इम्पीरिकल परिक्षण से किया, उन्होंने ये भी जांच की के प्रतियोगी कितने न्युरोटिक, एक्सट्रोवर्ट हैं और कितने दूसरों की बातों से जल्दी सहमत हो जाते हैं और अपनी बातों को खुल कर दूसरों के सामने रख पाते हैं |

जब लैपज़िग यूनिवर्सिटी ने जन्म के आर्डर को परिक्षण के परिणाम से तुलना की तो उन्होंने देखा की पहला जन्मा हुआ बच्चा उसके बाद होने वाले बच्चे से ज़ादा बुद्धिमान होता है|

लेकिन परिक्षण ये साबित करने में असफल रहा की जन्म के आर्डर से बच्चे के मानसिक, भावुक और कल्पना करने की शक्ति पर असर पड़ता है|

बात जब आईक्यू टेस्ट की आयी तो रेसेअर्चेर ने पाया की एक विशेष पैटर्न था जिससे पता चलता है की पहले जन्मे वाले बच्चों में लकभग 1.5 आईक्यू ज़ादा होता है जिसका मतलब है की उसके बाद होने वाले बच्चे से वो अधिक बुद्धिमान होगा | बेशक पहले ऐसा नहीं था लेकिन परिणाम से पता चलता है की एक परिवार में अगर दो बच्चे हैं तो पहले जन्मे बच्चे की बुद्धि उसके बाद होने वाले बच्चे से 60% अधिक होती है|

क्या ये आईक्यू जन्मजात होता है या विकसित हो जाता है?

जैसा के आपने सुना होगा की हमारी ज़्यादातर बुद्धि विकसित होती है| यह साबित हुआ की हमारी 40% बुद्धि जेनेटिक्स से आती है और बाकी, जीवन के साथ विकसित होती है| यह आस पास के वातावरण पर निर्भर करता है और यही दोनों बच्चों की बुद्धि के बीच अंतर भी लाता है|

बड़े बच्चों के बुद्धिमान होने का यह भी कारन होता है कि जन्म से ही उन्हें अपने माता-पिता से लगातार प्यार और ध्यान मिलता रहता है जो उसके बाद होने वाले बच्चे को नहीं मिल पाता क्योंकि उसे माता-पिता का प्यार बटा हुआ मिलता है|


माता-पिता को अपने पहले बच्चे से काफी उम्मीदें रहती हैं और इसी कारण उस बच्चे का आईक्यू बढ़ जाता है| इसी वजह से बड़े बच्चे अपने छोटे भाई-बहनों का ख्याल रख पाते हैं और उन्हें वो सब सीखा पाते हैं जो उन्हें उनके माँ-बाप द्वारा सिखाया गया था| अपने छोटो को सिखाने की इसी ज़िम्मेदारी के कारण बड़े बच्चे ज़्यादा बुद्धिमान बन जाते हैं | शायद 40% बच्चे जो पढाई में अच्छे नहीं होते उन्हें अपने चोटों को सिखाने की ज़िम्मेदारी नहीं दी जाती|

क्या ये मामला आपके बच्चों के साथ भी है? हमसे ज़रूर बाटें|

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