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नीचे कुछ तरीके हैं जिससे आप ये जान सकते हैं कि कैसे आप अपने बच्चे को प्रकृति के बारे में चौकन्ना और अधिक जागरूक कर सकते हैं:

1. उदाहरण के आधार पर अपने बच्चे को सिखाएं


हमें ये बताने की बिलकुल ज़रूरत नहीं पड़ेगी की बच्चे जो देखकर सीखते हैं वो बोलकर कभी नहीं सीख सकते| अपने बच्चे को कुछ कार्य करने के लिए उसे बोलने के बजाये उसे दिखाएं की वो कैसा किया जाता है| बच्चों को नक़ल करना पसंद होता है क्योंकि उससे उन्हें बड़प्पन महसूस होता है| बस वही करें- ब्रश करते समय नल बंद करदें, सारी बत्तियां बंद करदें अगर उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा, जब गाडी रुकी हुई है तो इंजन बंद रखें| ये सब आपके बच्चे को दिखायेगा की आप ना ही सिर्फ बोलते हैं बल्कि करते भी हैं|

2. प्रकृति से उनका वार्तालाप करवाएं


यह समझा जाता है कि आप उस चीज़ की बड़ी रक्षा करते हैं जिसकी आपको दिल से परवाह होती है| अपने बच्चे को तरह-तरह के प्राकृतिक वातावरणों के बारे में बताएं जिसके साथ वो जुड़ सकते हैं| उन्हें पार्क ले जाएँ, ट्रैकिंग और रॉक क्लाइम्बिंग करवाएं, राफ्टिंग करवाएं, बीच पर ले जाएँ, ठन्डे हिल स्टेशन का पता लगाएं और उन्हें नैशनल पार्क ले जाएँ| अपने बच्चे को प्रकृति में दिलचस्पी दिलाएं और बड़े होकर उन्हें खुद ब खुद अपनी प्रकति की चिंता होगी| आपके मनपसंद पार्क जाने की घडी आगयी जिसे पहले आप घूम ना पायी हों|

3. उन्हें बचत का महत्व समझाएं


उदाहरण के अनुसार चीज़ें सिखाना सही है लेकिन ये भी ज़रूरी है के बच्चों को थोड़ी बहुत चीज़ें अनुभव भी करने दें जिससे उन्हें बचत का महत्व समझ आये| उदहारण के लिए, आप एक इलेक्ट्रिसिटी-फ्री डे कर सकती हैं या दिन भर में इस्तेमाल करने के लिए उन्हें निर्धारित पानी दे सकती हैं| एक बार उन्हें बचत का महत्व समझ आजाये वो खुद ब खुद चीज़ें बचाने लगेंगे|

4. कम्पोस्ट और कचड़े को अलग रखें


ये दोनों चीजें ऐसी हैं जिन्हें घर पर भी किया जा सकता है| जब आप कम्पोस्ट और कचड़े को अलग रखते हैं आप पृथ्वी को इस काम से मुक्ति दे देते हैं| और जब आप इन्हें अलग रखते हैं तो कम्पोस्ट करना और आसान हो जाता है| बच्चों को इस चेन के बारे में बताएं- अलग रखें, कम्पोस्ट करें और अपना अनाज खुद उगाएं| ऐसा करने से उन्हें बायोडिग्रेडेबल और रेसाईक्लेबल कचड़ों के बीच अंतर समझ आएगा और खाने का महत्व समझ आएगा की अनाज उगाना कितना मुश्किल है|

5. गार्डेनिंग


गार्डेनिंग ना केवल आपके बच्चे को प्रकृति के करीब लाएगा बल्कि उन्हें सब्र और लगन का पाठ भी पढ़ायेगा| वो मेहनत से जो वो एक बीज बोयेंगे, उसे रोज़ाना पानी देंगे, फिर उसे उगता हुआ देखेंगे तो उन्हें गर्व महसूस होगा और साथ ही उन्हें समझ आएगा की एक पौधे को बड़ा होने में कितना वक़्त लगता है और उन्हें प्रकृति का महत्व भी समझ आएगा|

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