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इस पोस्ट के माध्यम से हम अपने पाठकों के साथ गर्भनाल के रक्त से जुड़े तमाम सवालों का उत्तर देंगे। इसके साथ ही अगर आपको और कोई भी सवाल पूछना है तो कमेंट्स में लिखें। हम अपने विशेषज्ञ से पूछकर आपको बताएँगे।

कॉर्ड ब्लड होता क्या है?

गर्भनाल(umbilical cord) में जो रक्त प्रवाह होता है उसे कॉर्ड ब्लड कहते हैं। इसमें एक ख़ास तरह के स्टेम सेल्स पाए जाते हैं जिनमें रक्त कोशिकाएं, अंगों और मांसपेशियों के पुनःनिर्माण करने की क्षमता होती है।

अमेरिका की प्रसिद्ध संस्था ऍफ़.डी.ए गर्भनाल के रक्त में पाए जाने वाले स्टेम सेल्स की क्षमता को परखने के लिए इंसानों पर परीक्षण कर रहे हैं। इन सेल्स का मस्तिष्क की चोट, ऑटिज़म(आत्मकेन्द्रीयता) और अन्य रोगों के लिए कारगर होना टेस्ट किया जा रहा है। इनका कई अन्य रोगों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। आपके शिशु के गर्भनाल के रक्त को जाने-माने भरोसेमंद स्टेम सेल/कॉर्ड ब्लड बैंक में सुरक्षित रखा जा सकता है।

कॉर्ड ब्लड बैंक कैसे काम करते हैं?

होने वाले बच्चे के माँ-बाप को कॉर्ड ब्लड के बारे में और भी बातें जाननी चाहिए। आपके नवजात शिशु की गर्भनाल और माँ का प्लासेंटा डॉक्टर्स द्वारा निकाल लिया जायेगा। इसमें से जो रक्त निकाला जाएगा उसे लिक्विड नाइट्रोजन में जीवित रखा जायेगा। ऐसा करने से कॉर्ड ब्लड शरीर के बाहर खराब भी नही होगा।

कॉर्ड ब्लड स्टोर करने के लिए आपके पास 2 विकल्प होते हैं:

1. आप उसे किसी सार्वजानिक ब्लड बैंक में डाल सकती हैं। कोई भी व्यक्ति जिसे कॉर्ड ब्लड के स्टेम सेल की ज़रूरत है वह इसका इस्तेमाल बिना आपकी इजाज़त के कर सकता है क्योंकि आपने सार्वजानिक स्टेम सेल बैंक में कॉर्ड ब्लड दान दिया है।

2. आप उसे प्राइवेट अस्पताल में रखने के लिए पैसे दे सकती हैं। इस प्रकार आपके परिवार के भविष्य में वह रक्त काम आएगा। आपके घर परिवार के सदस्य की बीमारी का उपचार करने में यह काम आएगा। कोई भी अन्य इंसान आपकी इजाज़त के बिना आपका निजी कॉर्ड ब्लड इस्तेमाल नहीं कर सकता।

कॉर्ड ब्लड कब लिया जाता है?

कॉर्ड ब्लड शिशु के जन्म के फ़ौरन बाद ले लिया जाता है। यह दर्द-रहित व सुरक्षित प्रक्रिया होती है। यह बच्चे की प्रसूति या डिलीवरी में कोई बाधा नहीं डालता। यह इतना जल्दी हो जाता है की शिशु को गोद में खिलाने तक माँ-बाप को पता भी नहीं चलता की शिशु का कॉर्ड ब्लड निकाला जा चुका है।

कॉर्ड ब्लड जमा करने की विधि ?

शिशु की गर्भनाल पकड़ना और उसे कैंची से काटना। यह प्राकृतिक प्रसूति या सी-सेक्शन में एक प्रकार से ही किया जाता है। अगर आप गर्भनाल को देर से कटवाना चाहती है तो आप अपने चिकित्सक से इसके बारे में सलाह ले लें।

अमेरिका के ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलोजी संस्था का कहना है कि बच्चे के जन्म के बाद और उसके गर्भनाल को लेने के बीच में 30 से 60 सेकण्ड का अंतराल होना चाहिए। ऐसा माना जाता है की यह नवजात शिशु के लिए लाभकारी होता है। हालाँकि यह कॉर्ड ब्लड की गुडवत्ता व मात्रा पर असर डालता है।

कॉर्ड ब्लड से रक्त कैसे निकालते हैं ?

आपके स्वास्थ्य चिकित्सक आपकी अम्ब्लिकल नस में एक सुई डालेंगे जिससे वह 10ml तक रक्त निकालेंगे। यह आपके शिशु के आसपास भी नहीं जाएगी।

सुई से निकाला हुआ रक्त एक विशेष बैग में ले लिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में मात्र 10 मिनट ही लगते हैं।

रक्त लेने के बाद कहाँ जाता है ?

एम्ब्लिकल कॉर्ड से लिया जाने वाला रक्त कॉर्ड ब्लड बैंक में ले जाया जाता है। इसके बाद उसकी जांच की जाती है। सब कुछ सही होने पर उसे लिक्विड नायट्रोजन में रख दिया जाता है।

कुछ पारिवारिक ब्लड बैंक गर्भनाल के रक्त के साथ साथ गर्भनाल का छोटा हिस्सा भी काट कर रखने का ऑप्शन देते हैं।

कॉर्ड ब्लड रखने के फायदे

इस रक्त में अन्य अंगों, मांसपेशियों, कोशिकाओं व सेल्स के पुनःनिर्माण की क्षमता होती है। यह कई रोगों जैसे की फ्रैक्चर, कैंसर, पार्किन्सन डिसीज़, ऑटिज़म वगैरह में लाभदायक होते हैं। वैज्ञानिक इनके अन्य संभावनाओं का पता लगा रहे हैं।

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