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 वैज्ञानिक कहते हैं की महिला के गर्भ धारण करने के 26 हफ्ते पहले ही उसके ब्लड प्रेशर द्वारा उसके होने वाले बच्चे का लिंग पता चल सकता है| महिला का उच्च सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर इस ओर इशारा करता है की वो लड़के को जनम देगी यदि लो सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर है तो वो लड़की को जन्म देगी|

कई रिसर्च ये दिखाते हैं की कोई भी तनाव वाली घटना जैसे की जंग, डिजास्टर और इकोनोमिक डिप्रेशन लड़के और लड़कियों के रेश्यो को बदल सकती है| ये बदलाव इसलिए होता है की ऐसे गंभीर घटना के समय यदि कोई महिला गर्भ धारण करती है तो ये उसके होने वाले बच्चे के लिंग पर निर्भर करता है की वो वैसे समय में जीवित रह पायेगा या नहीं|

जिन महिलाओं का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 106 mm Hg होता है वो लड़के को जन्म देती हैं और जिनका 103 mm Hg होता है वो लड़की को जन्म देती हैं| जब एक महिला गर्भ धारण करती है फ़ीटस का लिंग पिता के स्पर्म पर निर्भर करता है की वो X क्रोमोजोम था या Y| लो ब्लड प्रेशर होने के कारन लड़की का जन्म होता है इससे ये साबित हो सकता है की लो ब्लड प्रेशर में शायद मेल फ़ीटस जीवित नहीं रह पाता| अकसर जिन गर्भवती महिलाओं के मिसकैरेज होते हैं उनमें से अधिकतर मेल फ़ीटस होता है तो ये ज़ाहिर सी बात है की इसी कारन दुनिया में लड़कियों की मात्रा लड़कों से अधिक है|

 

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