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 विश्व भर में रोज़ कोई न कोई नया अनुसंधान चलता रहता है। कुछ वैज्ञानिकों ने अपनी आधुनिक खोज में ऐसे अद्भुत चित्र निकालें हैं जिनमें पता चला है की गर्भ में पल रहे शिशु अपना सर उस तरफ मोड़ते हैं जिस तरफ कोई इंसान का चेहरा होता है। उनकी नाक और आँख इंसान की दिशा से प्रभावित होते हैं।

परन्तु भ्रूण किसी सामान्य वस्तु के प्रति नहीं झुकता है। वह उसे नज़र अंदाज़ कर देते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक शिशु में चेहरे पहचानने की क्षमता उनके चेहरे के पूर्ण विकास से पहले ही आ जाती है।

 

शोधकर्ताओं ने इस बात की भी पुष्टि की शिशु के सेन्स ऑर्गन (ज्ञानेंद्री) अच्छे से विक्सित हो जाते हैं और भ्रूण का मार्गदर्शित करते हैं जबकि वह गर्भ में ही होता है।

यह शोध लंकास्टर यूनिवर्सिटी के प्रसिद्द वैज्ञानिक विन्सेंट रेड ने की है१। उन्होंने बताया की शिशु तीसरे त्रेमाहिक से बाहरी दुनिया से ज्ञान अर्जित करने लग जाता है।

 

उन्होंने बताया की रिकॉर्डिंग के वक्त जब जब वे या उनके सहायक वैज्ञानिक शिशु के पास जाते थे तब वह अपना सर घुमा लेता था। परन्तु जब शिशु की रिकॉर्डिंग होती थी तब वह मशीन की विपरीत दिशा में सर मोड़ लेते थे।

भ्रूण तीसरी तिमाही तक भली भांति सुनने लगते हैं। इस कारण वह अपना सर मोड़ते हैं या घुमाते हैं।

उन्होंने गर्भवती महिलाओं को ज्ञानवर्धक किताबें बोलकर पढ़ने की हिदायत दी है जिससे शिशु के दिमाग में अनजाने में ही जानकारी पहुँचती हैं साथ ही उनका रिश्ता माँ-बाप और उनके बाहरी वातावरण से गहराता जाता है।

वैज्ञानिकों ने कहा की जब उन्होंने 38 हफ्ते की गर्भवती महिला को परीक्षण के लिए लिया तो उनके पेट पर चेहरे के आकार की रौशनी डाली जिससे प्रभावित होकर शिशु ने अपना सर हिलाया।

उसी जगह जब उन्होंने चेहरे के आकर की जगह दूसरे आकार की रौशनी शिशु की तरफ डाली तब भ्रूण ने कोई ख़ास हरकत नहीं दिखाई।

रिसर्च के अंत में वैज्ञानिकों ने गर्भवती महिलाओं को तेज़ रौशनी और धुप से बचने की सलाह दी क्योंकि यह उनके अजन्मे बच्चे की आँखों पर कुष्प्रभाव डालती है और उन्हें अंधा बना सकती है।

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