garbhawastha-ke-samay-kabz

गर्भावस्था में कब्ज़ क्यों होता है?

कब्ज़ जिसे कॉन्स्टिपेशन कहते हैं, लगभग सौ में से 50 प्रतिशत महिलाओं में होता है। इसका मुख्य कारण है प्रोजेस्टीरोन नामक हॉर्मोन की शरीर में मात्रा बढ़ना। इस कारण शरीर की चिकनी मांसपेशियां धीमी गति से काम करने लगती हैं। इसका मतलब यह है की शरीर के इंटेस्टाइन भी और धीमी गति से काम करने लगते हैं।

कॉन्स्टिपेशन की प्रॉब्लम गर्भावस्था के अंतिम दिनों में और बढ़ जाती है क्योंकि शिशु के शरीर का भार माँ के गुदे पर पड़ता है। आइरन की गोलियां लेने से मुश्किल बढ़ती जाती है।

कब्ज़ की रोकधाम के लिए आप क्या कर सकती हैं?

आप नीचे दिए गए उपचारा अपना सकती हैं जिससे आपको कब्ज़ की परेशानी दूर करने में आराम मिलेगी ।

1. आप फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ लें जैसे की गेहूं, भूरी ब्रेड, ताज़े फल और सब्ज़ियां रोज़ाना लें।दलिया आसान और सेहतमंद स्नैक होता है। आप इसका इस्तेमाल भी कर सकती हैं।

2. आप सुबह ओट्स का नाश्ता करें। उसमें गेहूं का भूसा डालने से और अधिक स्वाद और सेहत बनती है। आप गौर कीजियेगा की इससे आपमें कितना बदलाव आ जाता है।

ओट्स का स्वाद आपको नहीं पसंद तो आप इसमें अपनी पसंद के फल छोटे छोटे टुकड़ों में काट कर डाल सकती हैं। इससे उनका स्वाद और पौष्टिकता बढ़ जाती है। आप चाहें तो नमकीन या फिर मीठे ओट्स बना कर खा सकती हैं। वैसे भी आज कल बाज़ार में रेडी टी ईट खाने भी मिलते हैं।

3. ढेर सारा पानी पीएं। दिन में आप इतना पानी पियें जिससे की आपकी मूत्र का रंग पीले से साफ़ हो जाये।

4. आप रोज़ाना फलों के जूस का सेवन करें। इससे आपके बदन में ऊर्जा आएगी।

5. कुछ लोगों को सुबह उठकर गरम पानी पीने से राहत मिलती है।

6. रोज़ाना व्यायाम करें। चलने फिरने से आपके बदन में रक्त संचार सक्रिय होता है। इससे आपकी आंतें भी काम करने लगती हैं।

7. मल रोकने की गलती न करें। जो महिलाएं समय पर मल त्याग नहीं करती या फिर मल को जानबूझ कर दबाये बैठती हैं वह कब्ज़ की शिकार हो जाती हैं।

अगर इन उपायों से कोई असर नहीं हो रहा तो आप डॉक्टर से परामर्श करवा कर दवाइयां ले सकती हैं। वह आपको कुछ ऐसी दवाइयां देंगे जिससे की आपका मल मुलायम होकर बाहर निकलने लगे।

क्या प्रेगनेंसी का कब्ज़ खतरनाक हो सकता है ?

आमतौर पर कब्ज़ जानलेवा नहीं होता है पर अगर मल में से खून आये, दर्द हो या फिर कब्ज़ के साथ डायरिया भी हो जाये तब आपको डॉक्टर से फ़ौरन मिलना चाहिए।

ध्यान दें :

मल त्याग करते वक्त मलनाली पर अधिक दबाव मत डालिये क्योंकि यह हेमोरोइड को बढ़ावा दे सकता है। हेमोरोइड मलाशय(rectum) की नसों की सूजन होती है। यह कष्टदायक होते हैं।

कमेंट में हमें दिक्कतें बताएं – इसे ज़रूर शेयर करें

Leave a Reply

%d bloggers like this: