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 विज्ञान तरक्की के पथ पर है। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने अपनी एक खोज में कहा है की उन्होंने एक ऐसी तकनीक इजात की है जिसके माध्यम से वे शिशुओं में होने वाली जेनेटिक बीमारियों को ठीक कर पाएंगे। इस पोस्ट में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताना चाहेंगे।

वैज्ञानिकों की विजय

कोरिया, चाइना और केलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने कहा है की उन्होंने एक ऐसे जीन को ढूंढ निकाला है जिससे गर्भ जब विक्सित हो रहा होता है तो उसमें शरीरिक बदलाव होने शुरू होते हैं। यह एक ऐसा जीन है जिससे हाइपरट्रोफी कार्डिओमायोपैथी यानि ह्रदय की तकलीफें पैदा होती हैं। इस जीन के कारण शिशु के ह्रदय की कार्य पद्धति में दिक्कत होने से उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

इस अनुसन्धान के लिए वैज्ञानिकों ने एक पुरुष वीर्य लिया था और उसकी मदद से 12 स्वस्थ्य महिलाओं को गर्भवती बनाया था। इस जीन की मदद से उन्होंने विक्सित हो रहे भ्रूण(fetus) के रोग से प्रभावित जीन को पहचान लिया और उसमें कुछ परिवर्तन कर दिए। उन्होंने उसमें स्वस्थ्य जीन डाल दिए।

72 प्रतिशत महिलाओं के शिशु जो जीन को बदल कर पैदा किये गए जा रहे थे स्वस्थ्य रूप से विक्सित हो रहे थे। उसी जगह जिन महिलाओं के भ्रूण के जीन में कोई हाथ नही लगाया गया उनमें बीमारी होना शुरू हो गई थी।

हालाँकि उन भ्रूणों को 3 दिनों के बाद नष्ट कर दिया गया क्योंकि कानून के मुताबिक शिशु को जेनेटिक बदलाव से पैदा नहीं किया जा सकता।

आप लोग सोच रहे होंगे की ऐसी विवादास्पद खोज करने की क्या ज़रूरत थी? अगर आज के वैज्ञानिक होने वाले शिशु की बीमारी को ढूंढ कर ठीक कर सकते हैं तो कल को उनके नैन-नक्श, कद-काठी इत्यादि को भी प्रभावित किया जायेगा।

पर वास्तव में ऐसा नहीं है। इस तकनीक का प्रयोग शिशु के गंभीर रोग ठीक करने के लिए ही किया जायेगा। ऐसा करने से भविष्य में लाखों बच्चों की ज़िन्दिगियां सवारी जा सकती हैं।

फिलहाल तो वैज्ञानिकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी जीन मॉडलिंग के लिए। यह भविष्य में कुछ गिने चुने देशों में होने के अनुमान हैं।

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