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जन्माष्टमी जिसे कृष्ण जन्माष्टमी भी कहा जाता है, श्री कृष्ण के जन्म दिन कि खुशियां मनाने के लिए मनाई जाती है। इस साल जन्माष्टमी 14 अगस्त को पड़ रही है। इसके अगले दिन ही देश का 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जायेगा। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कुछ शहरों में दही हांडी, व्रत, पूजा, कीर्तन, सत्संग, भजन, ढोल और खास मिठाइयां बनाई जाती हैं। भगवद गीता के अनुसार व्रत और पूजा-पाठ के अलावा, कृष्ण जी के लिए गीत गाना, रात में दिये जलाना और कृष्ण जी का नाट्य रूपांतर करना इस त्यौहार की महवपूर्ण निशानी हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी श्री गोविंदजी और इस्कॉन मंदिर में बड़ी धूम धाम से मनाई जाती है।

श्री कृष्ण की पृष्ठभूमि:

देवताओं में भगवान श्री कृष्ण विष्णु के 8वे अवतार हैं। वह एक गुरु के रूप में भगवद् गीता का पाठ पढ़ाते हैं। भक्त और गरीबों के दुखहर्ता बनते हैं तो युद्ध में कुशल नितिज्ञ। महाभारत में गीता के उपदेश से कर्तव्यनिष्ठा का जो पाठ भगवान श्री कृष्ण ने पढ़ाया है आज भी उसका अध्ययन करने पर हर बार नये अर्थ निकल कर सामने आते हैं। भगवान श्री कृष्ण के जन्म लेने से लेकर उनकी मृत्यु तक अनेक रोमांचक कहानियां है। इन्ही श्री कृष्ण के जन्मदिन को हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले और भगवान श्री कृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की कृपा पाने के लिये भक्तजन उपवास रखते हैं और श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं।

कब हुआ श्री कृष्ण का जन्म

जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को ही कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों के मतानुसार श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। अत: भाद्रपद मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यदि रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग हो तो वह और भी भाग्यशाली माना जाता है इसे जन्माष्टमी के साथ साथ जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

गर्भवती महिलाएं और कृष्ण जी के लिए व्रत

हमारी कई पाठिकायें कृष्ण जन्माष्टमी में अपने सभी घरवालों की खुशियों और सलामती के लिए व्रत रखना चाहेंगी। वैसे तो इसके लिए कोई कड़े नियम नहीं हैं परन्तु कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें।

1. व्रत थोड़ी थोड़ी देर के लिए रखें। बीच बीच में खाना खा लीजिये। ऐसा इसलिए क्योंकि लम्बे समय तक भूखा रहने से आपके पेट में गैस बनने लगेगी जो आपके शिशु के लिए बिलकुल ठीक नही है। गर्भावस्था में पेट की गैस शिशु के स्वास्थ्य को परेशानी देती है। इसके साथ ही पेट में गैस से आपके ह्रदय में जलन और पेट में दिकक्त होने लगती है।

2. व्रत में साबूदाने की खिचड़ी, फल, दही और उबले आलू में ज़रा सा तेल नमक और चाट मसाला डाल कर खा सकती हैं।

3. इस दौरान आप घर पर रह कर आराम करें और हलकी फुलकी सैर कर सकती हैं।

4. अत्यधिक मीठे से दूर रहें। मीठा खाने से आपको शुरू में अच्छा लगेगा परन्तु अगर आपके शरीर में ग्लूकोस लेवल कम हो गए तो फिर आपको चक्कर आ सकता है और आप बेहोश हो सकती है। घबराइए नहीं यह कोई गम्भीर बात नही है और साथ ही ऐसा आम तौर पर नहीं होता। अगर आप सेहत के प्रति लापरवाही करेंगी तभी ऐसा होगा।

5. अगर आप बीमार महसूस कर रहीं हैं तो व्रत न करें। सामान्य दिनों की तरह भोजन करें।

6. हो सके तो घर पर ही जूस बना कर पी लें। अगर आपके पास मिक्सर न हो तो आप सीधा फल भी खा सकती हैं।

हम आशा करते हैं की इस जन्माष्टमी आपके घर खुशियों की सौगात लाये। स्वस्थ्य और मस्त रहें। tinystep परिवार की ओर से हमारे सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएं।

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