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गर्भवती महिलाओं में कई शारीरिक परिवर्तन आते हैं। कुछ चाहे और कुछ अनचाहे। इनमें से एक है पैरों, घुटनों और एड़ियों में सूजन और दर्द होना। इस पोस्ट में हम आपको पैर दर्द सम्बंधित ज़रूरी मुद्दों के बारे में जानकारी देंगे।

क्या गर्भावस्था में पैर दर्द होना स्वाभाविक है ?

जी हाँ। गर्भावस्था के शुरुवाती महीनों से लेकर गर्भावस्था के अंतिम चरण तक पैरों में दर्द होना आम बात है। यह ज़्यादातर महिलाओं में होता है।

गर्भावस्था में पैर दर्द और सामान्य दिनों में पैर दर्द में क्या फर्क होता है ?

गर्भावस्था में महिलाओं में पैर दर्द अधिक तीव्र होता है। साथ ही महिला के पैरों में सूजन भी आ सकती है। जो महिला गर्भवती नही होती उसमें अधिक चलने या लम्बे समय तक खड़े रहने के कारण दर्द होता है। यह आराम करने से ठीक हो जाता है जबकि गर्भावस्था में दर्द होने पर दवा लेनी पड़ सकती है।

पैरों में सूजन क्यों आने लगती है ?

दरअसल गर्भावस्था में महिला के बदन में हार्मोन्स की मात्रा बदलने लगती है। इसका बदन में पानी की मात्रा पर असर पड़ता है। शरीर के कोने वाले हिस्से जैसे की हाथों की उँगलियों और पैरों के बॉडी सेल्स में पानी भरने लगता है जिस कारण पानी भरने से वह सूजे(फूले) नज़र आते हैं और पैर थोड़े भारी भी हो जाते हैं।

पैर दर्द होने के कारण ?

गर्भ में पलते शिशु के कारण गर्भाशय का भार पैरों पर पड़ने लगता है। जैसे जैसे शिशु का आकार बढ़ता जाता है, वैसे वैसे पैरों पर अधिक वज़न पड़ने लगता है। इससे पैरों की नसों को अधिक भार झेलने के कारण कमज़ोरी हो जाती है। इससे पैरों में सूजन आ जाती है। यह शिशु के जन्म के बाद मिट जाता है।

गर्भवती महिलाओं में पैर दर्द के अन्य कारण:

1. महिला के पैरों तक पर्याप्त रक्त संचार न हो पाने के कारण उसमें ऑक्सीजन की कमी से पैर दर्द होने लगता है। यह घुटनों, और पैरों की उँगलियों में भी होता है। कभी कभी पैर सुन्न पड़ सकता है।

2. महिलाओं में बदलते हॉर्मोन्स लेवल से पैरों में दर्द होता है।

3. शरीर की निचली मांसपेशियों का अलग होना: जैसे गर्भाशय का आकार बढ़ता है उस प्रकार बदन की निचली मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती हैं। इस कारण महिलाओं में पैर दर्द होता है।

4. महिला का वज़न बढ़ना: महिला के बढ़ते वज़न के कारण उसकी पैरों की हड्डी पर प्रभाव पड़ता है जिससे मांसपेशियों और पैरों में दर्द होता है।

5. यह शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी हो सकता है।

पैरों में दर्द कब ठीक हो सकता है ?

 

 

डिलीवरी के बाद महिलाओं में पैरों की सूजन और दर्द अपने आप ख़त्म हो जाता है। महिला पहले की तरह सामान्य दिनचर्या बिता सकती है।

पैर दर्द का निवारण ?

पैरों के दर्द से बचने के लिए पैर की उँगलियों को हलके हाथ से दबाएं। साथ ही गुनगुने तेल से मालिश करें! यह धीरे धीरे बेहतर परिणाम देगा। गर्भावस्था में ऊँची हील की सैंडल न पहनें। आरामदायम फ्लैट्स और ढीली चप्पलें पहनें। इनसे भी आपके पैरों और एड़ियों को आराम मिलेगा।

हम कामना करते हैं की डॉक्टर की बताई दवाई लेने से आपको राहत मिले।

स्वस्थ्य रहे, मस्त रहें और हमारे ब्लोग्स शेयर करती रहें। एक गर्भवती यह तकलीफ सबसे बेहतर समझती हैं। आप यह शेयर करके दूसरों की मदद करें। 

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