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 नौ महीने तक शिशु के जन्म के इंतेज़ार में आपने कई लम्हे बेसब्री से बिताये होंगे। परन्तु उसके देख कर जो ख़ुशी और सुकून आप महसूस करती होंगी वह बयान नहीं किया जा सकता। शिशु में खाने कहते और सोते वक्त जो बदलाव आते हैं उन्हें आप अपनी आँखों के सामने से देख सकती हैं।

शिशु के जन्म का पहला हफ्ता बहुत ही दलचस्प और रोमांचक होता है। नीचे दिए गए टिप्स आपके लिए उपयोगी साबित होंगे।

1. शिशु का पोषण व भोजन:

 

 

नवजात शिशु को हर 2-3 घंटे में माँ को स्तनपान कराते रहना चाहिए। हर शिशु की ज़रूरतें भिन्न होती हैं। इसलिए अपने शिशु की ज़रूरत समझें और उसके अनुसार काम करें।

2. शिशु के सर को संभालना:

 

 

शिशु का सर नाज़ुक होता है इसलिए उसे कोमल हाथों से पकड़ें। शिशु को हमेशा मुलायम तकिया पर सर रख कर सुलाएं।

3. शिशु को सुलाना:

 

 

जन्म के बाद शिशु भी थक जाता है। इसलिए आप चौंकिएगा नहीं अगर आपका शिशु 19 से 20 घंटे तक लगातर सो जाये। नींद शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण चीज़ होती है।

4. शिशु की मुठ्ठी:

 

 

नवजात शिशु की उँगलियाँ अक्सर मुट्ठी में बंधी होती हैं। अगर आप उसे खोलने की कोशिश करती हैं तो शिशु आपकी उँगलियाँ पकड़ने लगता है। हैरान मत हों क्योंकि यह शिशु की प्राक्रुतिक प्रतिक्रिया होती है।

5. नवजात का रोना:

 

 

शिशु अपने आस पास के लोगों व वातावरण को समझने के लिए आंसुओ और अपने रोने की चीख का सहारा लेता है। इस प्रकार उसके अभिभावक उसकी मांगें समझ पाते हैं और उनकी पूर्ती करते हैं। यह प्रकृति की रचना है कि जबतक शिशु बोल नहीं सकता तब तक उसके रोने से उसके माँ बाप उसकी भावना (भाषा) समझते हैं।

6. नवजात की धड़कन:

 

 

नवजात की ह्रदय गति एक वयस्क के मुकाबले अधिक तेज़ चलती है। उसकी हार्ट बीट 150 बिट्स प्रति मिनट हो सकती हैं। इस बात की फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं है।

7. शिशु का सामाजिक व्यवहार:

 

 

शिशु जन्म के बाद अपने आस पास की चीज़ों व लोगों से इंटरैक्ट करेगा। वह उनको छूने, पास जाने की कोशिश करेगा और थोड़ा बहुत हसने की कोशिश भी करेगा। आप इसका भरपूर आनंद उठा सकती हैं।

 

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