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रिसर्च से पता चलता है की लकभग 80% बच्चे ज़्यादातर अपने डीयू डेट से 2 हफ्ते पहले या 2 हफ्ते बाद जन्म लेते हैं| इसका मतलब ये होता है की आपको डॉक्टर के द्वारा बोले गए डीयू डेट से 2 हफ्ते पहले से ही तैयार रहना चाहिए, डीयू डेट अधिकतर आपके पीरियड्स की आखरी तारिख के 40 दिन शुरू होने पर तय किया जाता है|

डीयू डेट आपको अपने बच्चे की आने की तैयारी करने का मौका देता है, बच्चे के नाम से लेकर उसका जन्म किस अस्पताल में होना चाहिए इन सारी बातों की तैयारी करने का वक़्त मिल जाता है| सबसे बढ़कर आपको ये पता चल जाता है की कब तक आपकी सुबह की बीमारी ठीक हो जाएगी और आपके मूड स्विंग्स और बीच रात में कुछ चटपटा खाने की चाहत कब तक ख़त्म होने वाली है|

जैसे जैसे आपका डीयू डेट नज़दीक आएगा आप की परेशानी और चिड़चिड़ाहट बढ़ने लगेगी| ख़ास कर अगर ये आपका पहला बच्चा होगा तो आपको किसी चीज़ का अंदाज़ा नहीं मिलेगा और इंतज़ार करना जैसे आपके लिए एक परेशानी बन जाएगी| कभी-कभी आपको लेबर की तरह पेन होगा जिससे आपको लगेगा की अब आप डिलीवरी के लिए तैयार हैं लेकिन ये झूठे सिग्नल होते हैं जो दिन या रात कभी भी हो सकते हैं| ऐसी बहुत सारी बातें हैं जिससे आपको समझने में मदद मिलेगी की आपके पेट की दर्द वाक़ई लेबर पेन है या नहीं|

डीयू डेट जान्ने के बाद आपके परिवार के सारे लोग आपसे ज़्यादा आपके बच्चे के आने का इंतज़ार कर रहे हैं और आपसे अब बच्चे के आने का और इंतज़ार नहीं होता, अब आप अपने शरीर के दर्द और वो झूठ-मूठ के लेबर पेन से परेशान हो चुकी हैं| आखिर कार आपका बच्चा इस दुनिया में जन्म लेता है और वो भी अपने डीयू डेट से पहले या बाद में, इस तरह आपके 40 हफ़्तों की गर्भावस्था ख़त्म होती है| हम आपको सलाह देते हैं की आप ये मान कर ना चलें की डॉक्टर के द्वारा बताया गया डीयू डेट ही आपके बच्चे का जन्म दिन होगा, आखिर केवल 3-5% ही बच्चे अपने डीयू डेट में पैदा होते हैं|

रिसर्च ये दिखता है की जो महिलाएं पहली दफा माँ बन रही हैं वो अपनी गर्भावस्था के 41 हफ्ते में लेबर में जाती हैं, लेकिन जो महिलाएं पहले लेबर में जा चुकी हैं वो अक्सर 40 हफ्ते और 3 दिनों में बच्चे को जन्म देती हैं| ऐसा इस कारण होता है की कुछ औरतों की पीरियड्स साइकिल या तो लम्बी या फिर कम समय के लिए हो सकती है| एक्सपर्ट्स कहते हैं की अगर आपकी डिलीवरी डीयू डेट से लेट में हो रही हो तो आपके लिए प्राकृतिक रूप से डिलीवरी देना अच्छा होगा और ना की कोई दवा खाकर ज़बरदस्ती लेबर में जाना| बहुत सारी महिलाएं 40 दिन से अधिक दिनों के बाद लेबर में जाती हैं और ये एक्स्ट्रा दिन आपके होने वाले बच्चे के लिए उतना ही ज़रूरी होते हैं जितना की आपकी गर्भावस्था के दिन महत्वपूर्ण होते हैं|

लेकिन कुछ अस्पताल औरतों के गर्भावस्था के 41 हफ्ते होते ही उन्हें लेबर के लिए भेज देते हैं| खुद से लेबर में जाना आपके लिए और आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है, कोशिश करें की आपके डीयू डेट के एक्स्ट्रा दिनों में आप अपना और अपने बच्चे दोनों का अच्छी तरह ख्याल रखें ताकि उस समय कोई कम्प्लीकेशन ना आ सके| जब तक आपका डॉक्टर आपको इमरजेंसी के तहत लेबर में जाने की सलाह ना दें आप प्राकृतिक रूप से अपने बच्चे के आने का इंतेज़ार करें|

आखिर में हम यही बोलना चाहेंगे की आपका बच्चा चाहे डीयू डेट में हो या उससे पहले या उसके बाद, आपके लिए उतना ही ख़ुशी का पल होगा| इस पोस्ट को दूसरी महिलाओं के साथ भी शेयर करें ताकि वो भी इस डीयू डेट की परेशानी से मुक्त हो पाएं!

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