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यकीनन आपने शिशु के जन्म के लिए कुछ प्रयास तो किये होंगे परन्तु वह किस महीने पैदा होगा यह आपके हाथ में नहीं है। वैसे तो जन्म महीना इंसान के व्यक्तित्व को प्रभावित करता ही है परन्तु इसके साथ कुछ अन्य पहलू भी प्रभावित होते हैं।

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 आपको एक दिलचस्प बाप बताना चाहेंगे कि शिशु की सेहत उसके जन्म के महीने पर भी निर्भर करती है। आप राशि फल और कुंडली में विश्वास रखती हैं तो बेशक यह पोस्ट आपके लिए ही बना है। आपको इस पोस्ट में इससे जुड़ी अधिक जानकारी मिलेगी।

जन्म महीना और शिशु की सेहत के बीच का सम्बन्ध :

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हमने आपके सामने यह बात यूँ ही पेश नहीं की है। इसके पीछे वजह यह है की कुछ चीज़ों को लम्बे समय तक देखा और परखा गया था। उनके नतीजों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष दिया गया। दुनिया भर में वैज्ञानिक हर दिन कोई न कोई ज्ञानवर्धक शोध करते रहते हैं। एक पुरानी मेडिकल अनुसन्धान में 1,749,4000 शिशु जो सन 1900-2000 के बीच पैदा हुए उनके जन्म महीने,रोगों और मृत्यु पर गौर किया गया।

 

कुल 1688 बीमारियों में से 55 शिशु के जन्म माह पर निर्भर थीं। एक रोचक बात यह थी की मई और जुलाई में पैदा हुए बच्चे अक्टूबर और नवंबर में जन्मे बच्चों के मुकाबले अधिक स्वस्थ्य थे। मई और जुलाई में जन्मे बच्चे में रोग-प्रतिरोधक क्षमता अधिक थी।

फरवरी और अप्रैल में जन्मे बच्चों को जान का खतरा कम था।

शोध के महत्वपूर्ण परिणाम:

वैज्ञानिकों के अनुसार उनकी खोज में मददगार बातें पता चलीं। उदाहरण के रूप में आप यह पढ़ें:

1. अप्रैल-जुलाई में पैदा बच्चे को type 1 diabetes होने का खतरा अधिक होता है। इनकी तुलना नवम्बर से लेकर फरवरी में जन्मे बच्चों को मधुमेह की कम शिकायत आती है।

2. सर्दी में मौसैम में जन्मे बच्चों को साँस सम्बंधित मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। कहने का मतलब है की इन शिशुओं को अस्थमा होने का अधिक खतरा होता है।

इसके पीछे माना जाता है की शिशुओं को संक्रमण का खतरा अधिक होता है इसलिए वे श्वास रोगों से पीड़ित हो जाते हैं।

 हम इन बातों की 100 प्रतिशत गैरंटी नहीं लेते। केवल आपके मनोरंजन के लिए विश्व भर में क्या हो रहा है, इसलिए यह जानकारी प्रस्तुत की है। रोज़ कोई न कोई नई खोज हमें बीमारी, उनकी वजह और उससे बचने में मदद करती है। इसलिए हम आप सभी से यही कहना चाहेंगे की अगर आप:

# सही भोजान

# पर्याप्त नींद

# व्यायाम करेंगे

और इन सबसे महत्वपूर्ण अच्छे विचारों के साथ खुश रहेंगे तो आपको अपने शिशु के लिए चिंता करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। अगर माँ-पिता में से किसी एक को कोई भी रोग है तो इसको मद्देनज़र रखते हुए आप डॉक्टर से उचित वक्त पर परीक्षण करवा कर भविष्य में उत्पन वाले किसी रोग को होए से रोक सकेंगी।

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