बिछिया क्यों पहनी जाती है? जानें इसके फायदे और वैज्ञानिक कारण?

विवाह पश्चात् महिलाओं के प्रमुख सोलह श्रृंगार में से एक है पैर की उंगलियों में पहनने वाली बिछिया। ज़्यादातर बिछिया चांदी की बनी होती हैं। बिछिया के पीछे के वैज्ञानिक फायदों के बारे में शायद आप न जानती हों। तो इसके बारे में आप यहाँ जानें।

1. ऐसा माना जाता है कि बिछिया स्त्री के भीतर ऊर्जा को उत्पन्न करती है। पायल की तरह ही चांदी की बिछिया में भी इच्छा शक्ति उजागर करने की शक्ति होती है जो पहनने वाली स्त्री को हर प्रकार के नकारात्मक प्रभाव से दूर रखती है।

2. आधुनिक प्रतिस्पर्धिक जीवनशैली के कारण अधिकांश महिलाओं में तनाव आ जाता है। तनाव उनके बदन में हॉर्मोन लेवल्स में परिवर्तन पैदा करता है। इस कारण कई महिलाओं में अनियमित मासिक-चक्र की शिकायत आती है। ऐसी महिलाओं के लिए बिछिया पहनना अत्यंत लाभदायक होता है। बिछिया पहनने वाली स्त्रियों में मानसिक तनाव कम होने लगता है। जिस कारण हॉर्मोन लेवल नियंत्रित होने के साथ महिला की माहवारी समस्या को भी घटाते हैं।

3. साइटिक नर्व(sciatic nerve) पैर और रीढ़ की हड्डी में समबन्ध और रक्त संचार लाती है। बिछिया पहनने से इसपर दबाव पड़ता है जिस वजह से आस-पास की दूसरी नसों में रक्त संचार बढ़ता है।

इसके अतिरिक्त गर्भाशय(यूटेरस), ब्लैडर व आंतों में भी रक्त संचार बेहतर होता है।

प्रसिद्ध आयुर्वेदिक पद्धति की अक्युपंचर समान – मर्म चिकित्सा में महिलाओं में फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) को बढ़ाने के लिए बिछिया को महत्वपूर्ण माना गया है। बिछिया पहनने से महिलाओं को गर्भ धारण में आसानी होती है। चांदी एक गुड कंडक्टर धातु है, अतः यह पृथ्वी की ध्रुवीय ऊर्जा को अवशोषित करके शरीर तक पहुंचाती है।

विज्ञान की माने तो पैरों के अंगूठे की तरफ से दूसरी अंगुली में एक विशेष नस होती है जो गर्भाशय से जुड़ी होती है। यह गर्भाशय को नियंत्रित करती है। रक्तचाप को संतुलित कर इसे स्वस्थ रखती है। बिछिया के दबाव से रक्तचाप नियमित और नियंत्रित रहता है।

इस कारण उनका मासिक-चक्र नियमित हो जाता है। इसका दूसरा फायदा यह है कि बिछिया महिलाओं के प्रजनन अंग को भी स्वस्थ रखने में भी मदद करती है। बिछिया महिलाओं के गर्भाधान में भी सहायक होती है।

बिछिया एक्यूप्रेशर का भी काम करती है। जिससे तलवे से लेकर नाभि तक की सभी नाड़िया और पेशियां व्यवस्थित होती हैं।

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