जानिए मासिक धर्म के नियम और उनका वैज्ञानिक सत्य!


हिन्दू धर्म के अनुसार मासिक धर्म के दिनों में महिलाओं के लिए धार्मिक कार्य वर्जित हैं। ईश्वर की प्रतिमा का स्पर्श, पूजा करना और मंदिर या धार्मिक आयोजनों में जाना क्यों है वर्जित? क्यों मानी जाती हैं महिलाएं उन दिनों में अपवित्र? इन बातों की वजह जानने के लिए आप यह पूरा पोस्ट पढ़ें।

दिलचस्प कथा: इंद्र के पाप का प्राश्चित है मासिक धर्म

 

इंद्र का पाप धोने के कारण, पश्चाताप स्वरूप हर महीने स्त्रियों को मासिक धर्म होता है। मासिक धर्म के दौरान महिलायें ब्रह्म-हत्या का पाप ढो रही होती हैं, अपने गुरु की हत्या का पाप और गुरु के बिना भगवान नहीं मिलते इसलिए महिलाओं को मन्दिर नहीं जना चाहिये।

विभिन्न पाबंदियां जिनका पालन महिलायें करती थीं और कर रही हैं

1. महिलाओं को अन्य लोगों से अलग रहना क्योंकि ऐसे में स्त्रियों को अपवित्र माना गया है।

2. कहीं बाहर आना-जाना वर्जित होता है क्योंकि पीरियड्स में उन्हें बुरी नजर व बुरे प्रभाव जल्द ही लग जाते हैं।

3. इस अवस्था में उन्हें एक वस्त्र पहनना होता है,

4. जमीन पर चटाई बिछाकर सोना होता है,

5. अपना खाना स्वयं बनाना, और

6. अचार को हाथ ना लगायें, क्योंकि यह मान्यता है कि इस दौरान स्त्री के अचार छूने से वह सड़ जाता है।

7. महिलाओं को पीरियड्स में रक्त स्त्राव के कारण काफी कमजोरी आ जाती है। इसलिए महिलाओं को इन दिनो आराम करने के लिए कहा जाता है व अन्य कार्यो से दूर रखा जाता है।

8. महिलाओं में इस समय अशुद्धियाँ निकलती हैं जो आसपास के वातावरण के साथ-साथ उनके आसपास रहने वाले लोगो के लिए हानिकारक होती है। इससे संक्रमण फैलने का ड़र बना रहता है।

9. ऐसा कहा जाता है की उनके शरीर से कुछ विशेष प्रकार की तंरगे नकारात्मक (नेगाटिव एनर्जी) निकलती हैं जो की वातावरण को दूषित भी कर सकती हैं।

10. पुराने समय में मान्यता थी की मासिक धर्म के दौरान महिला पौधों में पानी दे तो पौधे सूख जाते हैं।

 

 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण:

1. विज्ञान की दृष्टि से देखें तो मासिक धर्म गर्भाशय की आंतरिक सतह एंडोमेट्रियम के टूटने से होने वाला रक्त स्राव है। गर्भधारण कर सकने के लिए इस प्रक्रिया का सामान्य होना आवश्यक है और शरीर में हारमोन नियंत्रण में भी इस प्रक्रिया की अहम भूमिका है। मनुष्य के पूर्वज कहे जाने वाले चिंपाजी की मादा में भी मेन्स्ट्रुएशन सायकल देखी जाती है।

2. इस प्रक्रिया के दौरान तीन से से आठ दिनों के दौरान करीब 35 मिलीलीटर खून बहता है। लेकिन बहुत ज्यादा रक्त स्राव की स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। 3। मोटापे और माहवारी का सीधा संबंध है। अगर कोई महिला मोटापे से ग्रस्त है तो माहवारी अनियमित हो जाती है और वजन कम नहीं होता। इसके लिए एक्सरसाइज बहुत अच्छा उपाय है।

3. मासिक धर्म या माहवारी एक सहज वैज्ञानिक और शारीरिक क्रिया है।

महिलाओं पर माहवारी में लगाई जाने वाली सामाजिक पाबंदियां किसी सजा से कम नहीं हैं। विशेष रूप से किसी त्योहार के समय ऐसा होने पर काफी दिक्कत और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।

 

 

क्या मासिक धर्म के दौरान जाप किया जा सकता है?

जिस प्रकार आप कभी भी अपने प्रेम, क्रोध और घृणा को प्रकट कर सकते हैं, जिस प्रकार आप कभी भी अपने मस्तिष्क में शुभ-अशुभ विचार ला सकते हैं, जिस प्रकार आप कभी भी अपनी जुबान से कड़वे या मीठे बोल बोल सकते हैं, उसी प्रकार आप कभी भी, कहीं भी, किसी भी स्थिति में प्रभु का ध्यान, उनका चिंतन, उनका स्मरण, उनका सिमरन या मानसिक जप कर सकते हैं।

 

इस्लाम क्या कहता है

इस्लाम में माहवारी के दौरान लड़की को नापाक यानी अपवित्र माना जाता है। उसे इबादत की अनुमति नहीं होता। वह कुरान भी नहीं छू सकती। पहली बार माहवारी होने पर लड़की को घऱ से बाहर नहीं भेजा जाता। उसे इस बारे में जानकारी दी जाती है कि क्या करना और क्या नहीं। सातवें दिन स्नान के बाद वह पवित्र होती है।

 

 

धीरे-धीरे बदल रहा है वक्त

कामकाजी महिलाओं को तो माहवारी के दौरान भी दफ्तर जाना पड़ता है। अब वे हर महीने तो इसके लिए छुट्टी लेकर घर नहीं बैठ सकतीं। हां, ऐसी महिलाओं को अब भी पूजा-पाठ या मंदिरों में जाने की इजाजत नहीं है। उम्मीद करते हैं कि हमारी बेटियों को इन तकलीफ और कुंठा से नहीं गुजरना पड़े जिससे हमारी गेनरेशन और हमसे पहले की ना जाने कितनी गेनरेशन्स गुजरी हैं।

इस पोस्ट को औरों के साथ शेयर करें और उनकी जागरूकता बढ़ाएं। एक औरत होने के नाते आप यह सब समझती हैं। आपको पता है क्या सही है और क्या गलत। यह लोगों को बताकर शिक्षित करने का फ़र्ज़ पूरा करें।   

Leave a Reply

%d bloggers like this: