प्रेग्नेंसी के दौरान कितनी बार अल्ट्रासॉउन्ड करवाना चाहिए?

   अल्ट्रासॉउन्ड गर्भावस्था का महत्वपूर्ण अंश है। हर महिला जो पेट से होती है, उसे समय-समय पर डॉक्टरी जांच करानी पड़ती है। इससे बच पाना नामुमकिन है। वैसे इससे घबराने की कोई बात भी नहीं है क्योंकि इसमें शरीर में कोई चीरा नहीं लगता बल्कि शरीर के बाहर रेडिओएक्टिव जेल लगाया जाता है जिसके माध्यम से शरीर के अंदरूनी हिस्सों को देखा जा सकता है।

डॉक्टर महिलाओं को नियमित जांच कराते रहने की सलाह देते हैं ताकि उनके बच्चे के विकास पर नज़र राखी जा सके। इससे आपको भी सहुलियत रहेगी की अगर बच्चे को कुछ भी हो तो समय रहते उसका इलाज हो जायेगा.

अल्ट्रासॉउन्ड कैसे काम करता है?

  अल्ट्रासॉउन्ड में डॉक्टर आपके पेट पर रेडिओएक्टिव जेल लगाते हैं जिसके माध्यम से शरीर के अंदरूनी हिस्सों को देखा जा सकता है। यह जेल लगाने के बाद आपके शरीर पर डॉक्टर एक मैग्नेटिक (चुम्बकीय) मशीन छुआते हैं। यह मशीन से मैग्नेटिक किरणें निकलती हैं जो जेल की सहायता से त्वचा को पार कर जाती हैं और शरीर के अंदरूनी हिस्सों का चित्र कम्प्यूटर स्क्रीन पर बन कर आता है।

 यह चित्र आजकल शिशु की 3-D इमेज भी देने लगा है।

अल्ट्रासॉउन्ड क्यों बेहतर है?

 आम x-ray टेस्ट्स में इस्तेमाल की जाने वाली किरणें शिशु को खतरा पहुंचा सकती थीं। इसीलिए डॉक्टर्स ने कुछ ऐसे परीक्षण बनाये जो शिशु की सेहत को हानि न पहुंचाए।

अल्ट्रासॉउन्ड में ध्वनि किरणें द्वारा चित्र उत्पन्न होता है। ध्वनि तरंगें अंदरूनी अंदरूनी अंगों से टकराकर वापस लौट आती हैं। जैसे ही ये टकराती हैं तो उसे मशीन पर इमेज/अल्ट्रासॉउन्ड रिपोर्ट के रूप में पकड़ लिया जाता है।

अनुभवी विशेषज्ञ इन्हें रिपोर्ट्स को सरल शब्दों में महिला को समझा देते हैं।

अल्ट्रासॉउन्ड में क्या क्या जानकारी प्राप्त होती है?

अल्ट्रासॉउन्ड द्वारा निम्नलिखित चीज़ों की जांच की जाती है:

1. गर्भ के अंदरूनी अंग और उनका सम्पूर्ण विकास सही ढंग से हो रहा है की नहीं।

2. शिशु के हाथ,पैर, ह्रदय का विकास

3. शिशु की हड्डियों में कोई संदिग्ध विकृति

4. शिशु की लम्बाई

5. शिशु गर्भ में किस अवस्था में पड़ा है- ब्रीच या सामान्य

6. बढ़ते शिशु का सर

7. माँ के शरीर में एमनीओटिक द्रव्य का स्तर

8. शिशु की पैदाइश के लिए एक दिनांक निर्धारित कर पाना

कितने अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की ज़रूरत पड़ती है?

अधिकतर स्वस्थ्य महिलाओं को दो स्कैन करवाने की सलाह दी जाती है। पहला स्कैन पहली तिमाही में कराया जाता है। इसे बच्चे के पैदा होने की तरीख जानने के लिए किया जाता है। दूसरा स्कैन 18 हफ़्तों पर किया जाता है। इसे शिशु के शरीर के सभी अंग सामान्य रूप से बढ़ रहे हैं पक्का करने के लिए किया जाता है।

अगर गर्भवती को मधुमेह या उच्च रक्तचाप की शिकायत तो उन्हें ज़रूरी हिदायत डॉक्टर द्वारा दे दी जाएँगी।

इस ब्लॉग में आपके लिए जानकारी प्रस्तुत की गई है। इसे डॉक्टर के सलाह के साथ ही इस्तेमाल करें। ब्लॉग शेयर ज़रूर करें।

 

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