इन खानों का सीधा असर शिशुओं के मानसिक और बौद्धिक विकास पर पड़ता है –

शिशु की बचपन की उम्र सबसे कोमल और नाज़ुक होती है। वे एक गीली मिट्टी के समान होते हैं जिन्हें जिस आकार में ढाला जाये वे उस रुप की शक्ल ले लेते हैं। बच्चे के जन्म के समय अगर उनके खानपान पर ध्यान दिया जाए तो चीज़ें जल्दी पकड़ने लगते हैं और अच्छे खानपान से उनकी कई कमियों में निखार लाया जा सकता है।

इस लेख में हम आपको खाने की कुछ ऐसी चीज़ों के बारे में बताएँगे जिनके सेवन से शिशु का दिमाग तेज़ बनता है और बच्चे की याददाश्त बेहतर हो जाती है।

1. बादाम

जब भी दिमागी वृद्धि की बात आती है उसमें बादाम अव्वल दर्ज़े पर रखा जाता है। इसके रोज़ाना सेवन से बच्चे के मस्तिष्क की कोशिकाएं सक्रीय बनती हैं।

2. अखरोट

 

बच्चों को अखरोट तोड़ कर दें। इससे बच्चे को दिक्कत नहीं होगी। अखरोट एक गुड़कारी मेवा है जिसे खाने से बच्चे की ऊर्जा व मानसिक क्षमता बढ़ती है।

3. हरी सब्ज़ियां

इनके सेवन के लाभ केवल मस्तिष्क को ही नहीं बल्कि शरीर के अन्य अंगों को भी मिलते हैं। शरीर हरी सब्ज़ियों से रक्त पैदा के लिए हीमोग्लोबिन का प्रोटीन प्राप्त करता है। भिंडी, कद्दू, बैंगन, लौकी, गाजर, सोया-मेथी, तरोई, कुंदरू, इत्यादि काफी लाभदायक होती है। साथ ही क्योंकि ये सीधी पेड़-पौधों से मिलती हैं इसलिए इनमें मिलावट कम होती है, ये अधिक स्वस्थ्य और ताज़ी रहती हैं। पालक को न भूलें।

4. दूध

दूध के साथ बोर्नविटा, बादाम मिल्क, शहद, बादाम, केला जैसे कोई भी चीज़ का सेवन उसकी पौष्टिक गुड़वत्ता को और बढ़ा देता है। दूध खुद ही इतना चमत्कारी होता है की उसके साथ अन्य चीज़ें अधिक लाभदायक बन जाती हैं। दूध में फैट्स, कार्बोहाइड्रेट्स, विटामिन्स, मिनरल्स और ऊर्जा पायी जाती है।

5. अंडे

अंडे में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स पायी जाती हैं। इनके सेवन से मस्तिष्क की कोशिकाओं में एकाग्रता जागृत होती है। यह शिशु की याददाश्त तेज़ करते हैं और बच्चे चीज़ें, नाम, रंग, संख्यायें अच्छे से याद रखने लगते हैं। इसके साथ ही उनके बाल भी अच्छे होते हैं।

6. अंकुरित अनाज

रागी, आटा, जोवार, बाजरे में फोलेट नाम का केमिकल तत्व पाया जाता है। यह शरीर के लिए असरदार होता है। फोलेट बच्चों में चुस्ती-फुर्ती लाता है साथ ही मस्तिष्क के विकास में मदद करता है।

7. ओट्स

आधुनिक दौर में ओट्स का फैशन सा चल पड़ा है। आज कल आप टीवी पर कई विज्ञापन देखते होंगे जिनमें ओट्स के सेवन को बढ़ावा दिया जाता है। ओट्स खाने से शरीर में फाइबर का प्रचार होता है। साथ ही ये चर्बी नहीं बढ़ाते। शरीर इन्हें आसानी से पचा लेता है। ओट्स को कई फ्लेवर और तरीकों से पकाया जा सकता है। यह इसकी खासियत है। अगर आपका बच्चा मीठे का शौक़ीन है तो आप उसे दूध, चीनी, शहद, केले के टुकड़े काट कर दे सकती हैं। अदि शिशुओं को मीठा नहीं भाता तो आप सब्ज़ी वाला ओट्स बना कर शिशु को दे सकती है।

ओट्स खरीदने के लिए आप बाज़ार से रेडी-मेड पैकेट खरीद सकती हैं।

8. मछली

हमने इसे आखरी में इसलिए रखा है ताकि हमारी शाकाहारी पाठिकाएं नाराज़ न हों 🙂 मछली को पका कर, तेल में फ्राई/तल कर, खारे पानी में उबाल कर या फिर फिश कॉड लिवर गोली के रूप में बच्चे को दिन में दोपहर या रात के समय दे सकती हैं। सुबह भी दे सकते हैं बस ध्यान रखे की बच्चे की खुराक से कई गुना न दें।

इसके साथ ही

i) नियमित दिनचर्या, समय पर अपने काम को पूरा करना,

ii) प्रतिदिन शारीरिक गतिविधि, खेलकूद, सैर सपाटा,

iii) पर्याप्त नींद,

iv) साफ-सफाई रखना

ये कुछ ऐसी अच्छी आदतें हैं जो शिशु के दिमागी विकास के साथ साथ उसे एक अच्छे इंसान के रूप में तब्दील करती हैं। इन आदतों से शिशु को भविष्य में काफी मदद मिलेगी।

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