अपने शिशु को खाना कैसे खिलाएं की वह उल्टी ना करें

अपने शिशु को रोज़ खाना उगलते हुए देखना किसी भी मां के लिए बहुत दिल दुखाने वाला होता है। पोषण के नुक्सान के बारे में सोचकर हर मां को चिंता होती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है की शिशु क्या खाता है स्तन का दूध या अन्य खाद्य पदार्थ,वह हमेशा उल्टी के रूप में बाहर आ जाता है। सभी प्रयास और तैयारी व्यर्थ जाती है क्योंकि शिशु हर बार खाना बाहर उगल देता है।

आप यह माने या ना माने, शिशु की उल्टी साफ करना बहुत ही अजीब लगता है। हालांकि वह आपका हिस्सा है और उसकी साफ-सफाई आपकी परवरिश का हिस्सा है, पर किसी भी इंसान के लिए उल्टी साफ करना बहुत ही घृणित होता है।

शिशु उल्टी क्यों करते हैं?

उल्टी शरीर की शारीरिक प्रतिक्रिया है,जब वह जर्म्स, टोक्सिन या जहरीले पदार्थ को अस्वीकार कर देती है। लेकिन लगातार उल्टी होना खतरनाक है क्योंकि यह किसी गंभीर स्थिति का संकेत है। शिशु खाने के बाद कई कारणों से उल्टी करते हैं जैसे फूड रिएक्शन या पाचनतंत्र में सूजन आदि।

 

उनके तंत्र का विकास अब भी हो रहा होता है , अचानक भोजन या स्वाद में बदलाव से उन्हें रिफ्लक्स होती है और फिर उल्टी। रिफ्लक्स अपच भोजन होता है जो भोजन नली के द्वारा शरीर से बाहर निकलता है। शिशु के पेट की मांसपेशियां जो भोजन को पेट में रखती है वह शिशुओं में ढीली होती है क्योंकि उनका तंत्र अब भी विकसित हो रहा होता है।इसी कारण कुछ शिशु भोजन के बाद उसे उगल देते हैं।

शिशु का भोजन उगलना सामान्य है और आप इसे नियंत्रित नहीं कर सकती हैं। शिशु तब भी उगलता है जब आप उन्हें सभी भोजन का मिश्रण देती है। तीन साल की उम्र के बाद शिशु इतना उगलना छोड़ देंगे और इसपर नियंत्रण रख सकेंगे।

 

शिशु के भोजन उगलने के बाद उनका ध्यान कैसे रखें?

प्रोजेक्टाइल उल्टी तकलीफदेह होती हैं। यह आपके तंत्र से सबकुछ बाहर निकाल देती है। यह थकान का कारण है और शिशु बहुत ही छोटे होते हैं इसलिए उन्हें बहुत देखरेख की जरूरत होती है क्योंकि वह अपनी देखभाल खुद नहीं कर सकते हैं। अपने शिशु की देखभाल करने के दौरान आपको यह चीजें करनी चाहिए:

शिशु को हाइड्रेट रखें

ऊर्जा और ताकत वापस पाने के लिए पर्याप्त आराम जरूरी है

अगर उल्टी के बाद शिशु दोबारा खाना नहीं खाता है तो जबरदस्ती ना करें।

अगर आपका शिशु बारह घंटे या उससे अधिक नहीं खाता है,तो चिंता ना करें उन्हें दोबारा भूख लग जाएगी। जब आपके शिशु को भूख लगे तो उन्हें इस बार मसला हुआ भोजन दें और उन्हें हाइड्रेट रखें।

अगर वह भोजन मांगें तो अपने चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान के साथ उन्हें सेरेल्स या बिना मसाले के नूडल दें।

उन्हें पर्याप्त प्यार, देखरेख और दुलार दें। इस दौरान जल्दी ठीक होने के लिए उन्हें प्यार की जरूरत है।

 

Leave a Reply

%d bloggers like this: