ज़्यादा साफ़ सफाई भी बन सकती है बच्चे के लिए हानिकारक… जानिये कैसे

   हर मॉं अपने बच्चे की सेहत को लेकर काफी सजग रहती है. कई मां बच्चे की साफ़ सफाई का कुछ ज़्यादा ही ख्याल रखती हैं। आप अपना घर पूरी तरह से साफ़ रखती हैं, बच्चे को बहार कम से कम निकलने देती हैं ताकि वो बहार फैली धूल, मिटटी, प्रदूषण से बच सके। या कभी वो बहार जाए और जब वापस आये तो एक्स्ट्रा केयर में उसे एंटी बैक्टीरिया लोशन से साफ़ करती है।

यही नहीं, कुछ माँ तो अपने बच्चों के खिलौने तक भी बैक्टीरिया फ्री लोशन से साफ़ करती हैं और उसके बाद वो बच्चे को खिलौने से खेलने देती हैं। बात की जाए नवजात शिशुओं की तो कुछ लोग उन्हें भी हर बार हाथ धो के छूते हैं।.

 

उनका मानना होता है कि हाथों में लगे बैक्टीरिया बच्चे को नुक्सान पहुंचा सकते हैं। अगर ऐसा ध्यान आप एक लिमिट में रह कर करें तो ठीक है लेकिन हद से ज़्यादा केयर भी बच्चे के लिए ठीक नहीं है।

 

 

एक स्टडी में यह सामने आया है कि अगर आप अपने बच्चे की हद से ज़्यादा केयर कर रहे हैं तो वो बी ठीक नहीं है। बच्चों के विकास और अभिभावकों के लिये लिखी एक किताब में लिखा है कि ज़्यादा साफ़ सफाई बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालती है। इसमें कहा गया है कि बच्चो को ज़्यादा घर में रखना बच्चों के स्वास्थ्य विकास में रुकावट बन रही है।

 

 

विशेषज्ञयों की मानें तो थोड़ी बहुत धूल मिटटी और बैक्टीरिया से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इनका मानना है कि सूक्ष्म जीवों और बैक्टीरिया से हमारा दो चार होना बहुत ज़रूरी है।

 

 

 

बचपन में इनकी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए ज़रूरी है कि आप अपने बच्चे को आगे आगे चलकर बड़ी बीमारियों से लड़ने लायक बनाना चाहती हैं तो उसे बाहर थोड़ा बहुत धूल मिटटी में खेलने दें।

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