(video)नन्हीं सी जान और इतनी समझ ! माँ को पहचान लिया, आखिर गर्भ का रिश्ता है –

 

 

                    

 एक बच्चा , बोलने की कोशिश या अस्पष्ट शब्दों में बड़बड़ाना बहुत कम उम्र से शुरू कर देता है और ऐसा वो दो साल की उम्र तक कर सकता हैं । हालाँकि उनकी यह बड़बड़ाहट बिना सोचे समझे निकाली गयी आवाज़ और असंबंधित लग सकती है, लेकिन इन ध्वनियों में आम तौर पर कुछ अर्थ होता हैं, और इन्हे वो एक खास पैटर्न में दोहरातें हैं। आम तौर पर, बच्चे के बोलने की इस कोशिश को प्रारंभिक संकेत के रूप में लिया जाता है कि बच्चा किसी भाषा के लिए खुद को तैयार कर रहा है , और इस तरह की आवाज़ें निकालना किसी भाषा का प्रारंभिक,  टूटा रूप होता है।

इस क्षेत्र में कुछ शोध किए गए हैं,  प्रिस्किल्ला डनस्टन द्वारा किया गया शोध इस क्षेत्र में सबसे प्रमुख शोधों में से एक हैं। उन्होंने अपनी इस शोध में बच्चों द्वारा निकाली गयी सामान्य आवाज़ों का जिक्र किया है,  जिसे हर बच्चा निकालता है, चाहे वो किसी भी देश या क्षेत्र का बच्चा हो !

 

1. भूख की आवाजें

 जब उन्हें भूख लगी होती है ,और वो चाहतें है कि, आप उन्हें खिलायें तो बच्चे अपने अस्पष्ट आवाज़ में “नेह” बोलतें हैं । अगर आप इसे ध्यान से सुनें, तो यह ध्वनि अपेक्षाकृत समझने में आसान है, जब आपका बच्चा इसे बड़बड़ा रहा हो या रोते हुए बोल रहा हो । कभी-कभी, बच्चा आपकी तरफ या कोई खाने की तरफ देखते हुए,  दूसरी आवाजें भी निकाल सकता है । बच्चो की यह आवाज़ बताती है,  कि उन्हें भूख लगी है।

2. सोने के लिए आवाज़ें निकालना

हमारी तरह बच्चे भी जब थक जातें हैं, और सोना चाहतें हैं, तो हमारी तरह ही वे जंभाई (yawning ) की आवाज़ें निकालतें हैं। हालांकि, आपका बच्चा बड़ों की तरह जंभाई (yawning ) की आवाज़ें नहीं निकाल पाता इसलिए अपनी आवाज़ से “ओउ” की ध्वनि निकालता है। इसके साथ ,बच्चा अपनी आँखें भी बंद कर लेता है और अक्सर चिड़चिड़ापन भी दिखाता है।

 

3. जब वह असुविधा महसूस करता है 

 

जब हम बड़े, असुविधाजनक महसूस करतें हैं, तो हम खुद को ठीक करने की कोशिश करतें है, और हमारी ये कोशिश हमारे चेहरे पर दिख जाती है। बच्चे भी कुछ ऐसा ही कुछ करतें है, जब वे असहज होतें हैं तो, वे भी अजीब चेहरा बनाते हैं। जब वे असुविधाजनक स्थिति में होते हैं तो वे आम तौर पर “अह ” या “उह” की आवाज़ निकालतें हैं । शिशु भी कभी कभी परेशान हो जाते हैं और ऐसे में वे अपनी बाँहों और पैरों को चलाना शुरू करते हैं।

4. डकार निकालना 

 

आपके बच्चो को हल्की गैस्ट्रिक की समस्या हो सकती है ,जिससे वो डकार निकालना चाहतें है। कभी कभी वो ऐसा खुद नहीं कर पाते और आपकी मदद चाहतें हैं। इसलिए डकार लेने की कोशिश में और आपकी सहायता पाने के लिए भी वे अह या आह की आवाज़ निकालतें हैं । गैस की वजह से हुई इस तकलीफ से बच्चों को दर्द भी हो सकता है और इस दर्द की वजह से वे बहुत ज्यादा रोते हैं |

 

5. जब बच्चा खेलना चाहता है 

जब बच्चा ऊब जाता है और खेलना चाहता है, तो वह आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए अलग-अलग तरह की आवाज़ें निकालता हैं, ताकि आप उन्हें उठा कर उनके साथ खेलें। यह अक्सर “ओह ” या “उह” जैसी आवाज़ होती है, और बच्चा आप को देखकर अपने हाथों को उठाता है।

एक बच्चा अपनी शब्दावली में उन शब्दों को सीखता है ,जिस भाषा में उनसे बात की जाती है । इसलिए माता-पिता के लिए यह महत्वपूर्ण है कि इसका ध्यान रखें कि वे बच्चे के सामने क्या बात कर रहें है। उपर्युक्त ध्वनियों के अलावा, बच्चे “मा-मा” कहने लगते हैं, जो माता के लिए कहतें हैं, और “दा-दा”, या “पा-पा-” पिता के लिए कहतें हैं। आपके बच्चे जब भी आवाज़ें निकालें, उनसे आप बातचीत करतें रहें, इससे उन्हें भाषा को सीखने और परिष्कृत करने में मदद मिलती है।

क्यूकि, माँ और बच्चे का रिश्ता ही ऐसा हैं – आप सहमत हैं तो ज़रूर शेयर करें –

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